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बूढ़ी मां को सड़क पर छोड़ गया बेटा, रुला देगी एक मां की कहानी

पति का निधन, बेटा घर छोड़कर चला गया, अब भीख मांगकर भर रहीं पेट, नगर निगम ने भी बंद की पेंशन

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ग्वालियर। 70 साल की उम्र में जब उन्हें घर में आराम करना था, तब घर-घर भीख मांगने को मजबूर होना पड़ रहा है। कभी अपने खुद के मकान में रहने वाली कमला बाई आज वीरपुर मरघट के पास एक झोपड़ी में रहकर किसी तरह जीवन यापन कर रही हैं। 10 साल पहले उनके पति की मौत हो गई, बाद में उनका बेटा भी घर छोड़कर चला गया, तो वे बिलकुल असहाय हो गईं। उन्हें नगर निगम से वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, जिससे उनका कुछ काम चल जाता था, लेकिन एक साल से उन्हें पेंशन नहीं दी जा रही है, जिससे वह भीख मांगने को विवश हो गई हैं। पेंशन के लिए उन्होंने निगम मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय व जनमित्र केंद्र के तमाम चक्कर काटे, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

बुजुर्ग महिला ने बताया कि मेहनत मजदूरी कर और नाते रिश्तेदारों से कर्ज लेकर दो बेटियों की शादी तो कर दी, लेकिन रिश्तेदारों से लिए कर्ज के रुपए चुकाने के लिए वह इधर-उधर मेहनत मजदूरी करती है। सुबह व शाम को घर-घर खाना मांगकर पेट भरती है। वह बताती हैं कि एक साल पहले उन्हें पेंशन मिलती थी, लेकिन अब पेंशन नहीं आने से वह खाने को भी मोहताज हो गई है, और भीख मांगकर पेट भर रही है। पेंशन के लिए वह एक साल से निगम ऑफिसों के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक पेंशन नहीं मिली है।

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हादसे में चली गई पति की जान

कमला बाई ने पत्रिका को बताया कि सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन करीब 10 साल बाद एक हादसे में पति की मौत हो गई। उसके बाद जैसे-तैसे कड़ा संघर्ष कर चार बेटियों व एक बेटे की जिम्मेदारी कंधों पर उठाकर उनका पालन पोषण किया। दो बेटियों व एक बेटे की शादी भी कर दी, लेकिन बहू की मौत होने के बाद बेटा घर छोड़कर कहीं चला गया, जो आज तक घर नहीं आया।

बच्चों की शादी के लिए बेच दिया मकान : कमला बाई ने कहा, बेटे-बेटियों की शादी के के लिए मकान भी बेचे दिया और कुछ जमीन थी दंबगों ने दबा ली है। अब वह वीरपुर मरघट के पास एक झोपड़ी में रह रही हैं। अब सिर्फ पांच हजार का कर्ज रह गया है।