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खतरे में नादान, किडनेपर्स के टारगेट पर बचपन

लापता बच्चों में लड़कियों की गिनती ज्यादामानव तस्कर से लेकर फिरौती के लिए बच्चे हो रहे शिकार

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Children of Muflis family at Target

खतरे में नादान, किडनेपर्स के टारगेट पर बचपन

ग्वालियर। नादानों का बचपन खतरे में हैं, क्योंकि वह किडनेपर्स के टारगेट पर हैं। यह हम नहीं लापता बच्चों की गिनती बोल रही है। नए साल की शुरूआत में २७ दिन में २१बच्चों के गायब होने की शिकायत सामने आई हैं। इनमें लड़कियां ज्यादा हैं।

इन्हें कौन ले गया, कैसे ले गया। परिजन और पुलिस की अपनी दलीलें हैं। नाबालिग होने की वजह से पुलिस ने बच्चों का अपहरण माना है। उनकी तलाश की थ्योरी में मानव तस्करी का एंगल भी रखा है। लेकिन तलाश का पैमाना उनकी उम्र के हिसाब से तय किया जाता है। यही वजह है कई बच्चे वापस नहीं मिलते हैं।
आकंडों के मुताबिक पिछले 8 साल में प्रदेश में 67 हजार 125 बच्चे लापता हुए हैं। इनमें लड़कियां ज्यादा है। जिले में यह अपराध जारी है। लेकिन इसे रोकने के लिए एक्शन प्लान नहीं है। जबकि कुछ साल पहले खेड़पति मंदिर से 4 साल की बच्ची को अगवा करने में पकड़े गए बच्चा चोर गैंग से मानव तस्करी रैकेट का खुलासा हो चुका है। इस गिरोह से ९ लड़कियां बरामद हुई थी।

जिन्हें बदनापुरा में देह कारोबारियों के जरिए रेड लाइट एरिया में खपाने के लिए चुराया गया था। लेकिन इसके बावजूद बच्चों के अपहरण की वारदातों को काबू करने की ठोस कवायद नहीं हुई। बल्कि पुलिस की थ्योरी में १० साल से कम उम्र के बच्चे का लापता होना गंभीर रहता होता है। इससे ज्यादा उम्र के बच्चे बालिग तो नहीं हैं, लेकिन एक्टिव होते हैं। अक्सर घूमने या किसी दोस्त के साथ चले जाते हैं। इसलिए उनकी तलाश का पैमाना, भी कुछ अलग रहता है। यह मानती है लापता बच्चे खुद वापसी भी कर सकते हैं।
गफलत में संगीन वारदातों का शिकार
आतंरी से २९ दिन पहले १६ साल की लडक़ी के गायब होने पर पुलिस इसी गफलत में रही। जबकि उसे अगवा करने वाले अजीत रजक ने उसके साथ बलात्कार किया। दोस्त जगदीश और गोलू बघेल के साथ उसकी हत्या कर लाश चंबल नदी में फेंक दी। तीनों ने २२ दिन बाद जुर्म का खुलासा किया। लेकिन पुलिस नदी में लाश नहीं ढूंढ पाई।
मुफलिस परिवार के बच्चे टारगेट पर
गरीब और कमजोर परिवारों के बच्चों के अगवा होने गिनती ज्यादा रहती है। बच्चों को अगवा करने में पकड़े गए अपराधी भी खुलासा कर चुके हैं। ऐसे परिवारों में परिजन भी बच्चों की निगरानी को लेकर लापरवाह रहते हैं। इसके अलावा बच्चे के गायब होने की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते हैं तो उन्हें ज्यादा तव्वजो नहीं मिलती। यह परिवार बच्चों की तलाश के पुलिस पर दवाब डालने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए ज्यादातर परिवार इसे किस्मत मानकर चुप बैठते हैं।
२७ दिन में यहां से अगवा हुए
माधवगंज ३, गोला का मंदिर २, भितरवार १, झांसी रोड ३, हजीरा २, थाटीपुर ३ जनकगंज २, डबरा २, मोहना १, मुरार १ और बहोडापुर १ नाबालिग अगवा
लगातार तलाश, ज्यादातर अगवा बच्चे बरामद
जिले में बच्चों के अगवा होने के कई मामले दर्ज होते हैं। उनकी रेग्यूलर तलाश की जाती है। इनमें ज्यादातर बच्चे रिकवर भी हुए हैं। प्रदेश में बच्चों की बरामदगी में जिला प्रदेश के दूसरे शहरों से आगे है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी लापता बच्चों की तलाश में साल में दो तीन बार अभियान चलाया जाता है।
अमित सांघी एसपी ग्वालियर