लॉ-ग्रेजुएट प्रेमलता पहले कोर्ट में केस लड़ती थीं और पिता के देहांत के बाद वे जीवन के संघर्षों से लड़ रही हैं। उनका कहना है कोमल है-कमजोर नहीं, नारी का नाम ही शक्ति है। शहर की आदर्श कॉलोनी में रहने वाली प्रेमलता कपूर गुरुद्वारा चौक पर स्थित अपने पिता स्व. नंदकिशोर कपूर की मौत के बाद वर्ष 2006 से दुकान का संचालन कर रही हैं। पे्रमलता की दो बड़ी व दो छोटी बहने हैं, जिनकी शादी हो चुकी है, लेकिन प्रेमलता ने शादी नहीं की। क्योंकि जब वो छोटी थीं, तब उन्होंने दादी व अपनी मां के बीच यह बातें सुनी थीं कि बेटा नहीं है,तो कैसे जीवन कटेगा। प्रेमलता कहती हैं कि यह बातें सुनने के बाद से ही मैंने यह सोच लिया था कि परिवार में बेटे की कमी को मैं कभी महसूस नहीं होने दूंगी। तभी से यह ठान लिया कि जैसे बेटा अपने परिवार की देखभाल करता है,ठीक वैसे ही मैं भी अपने परिवार का बेटा बनूंगीं। पिता का देहांत होने के बाद उनकी चिता को मुखाग्रि भी पे्रमलता ने दी थी।