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चंबल के डकैत पान सिंह तोमर का एनकाउंटर करने वाले IPS का निधन, इनके डर से फूलन देवी ने आत्मसमर्पण पर रखी थी ये शर्त

आपको बता दें 1975 बैच के आइपीएस विजय रमन मप्र से जुड़ा एक ऐसा नाम है जिन्होंने ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में पनाह लेकर पूरे क्षेत्र को दहशजदा करने वाले डकैतों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया था...आप भी जानें ये इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स...

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चंबल के बीहड़...नाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर एक खौफ नजर आने लगता था। इस खौफ का एनकाउंटर करने वाले आइपीएस विजय रमन का पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे कैंसर से जूझ रहे थे। आइपीएस वियज रमन की पत्नी का कहना है कि फरवरी में उनका कैंसर डाइग्नोस किया गया था। उसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था। आपको बता दें 1975 बैच के आइपीएस विजय रमन मप्र से जुड़ा एक ऐसा नाम है जिन्होंने ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में पनाह लेकर पूरे क्षेत्र को दहशजदा करने वाले डकैतों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया था...आप भी जानें ये इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स...

पान सिंह तोमर एनकाउंटर केस

चंबल के बीहड़ों में एथलीट से डकैत बने पान सिंह तोमर का खौफ लोगों के दिलों में ऐसा था कि शाम होते ही लोग घरों में कैद हो जाते थे, लेकिन रातों में सोते नहीं थे। चैन की नींद तक उन्हें नसीब नहीं होती थी। चंबल के इन बिहड़ों में उनके लिए छिपना इतना आसान होता था कि पुलिस उन तक पहुंच ही नहीं पाती थी। लेकिन सन 1981 में डकैत पान सिंह तोमर का एनकाउंटर विजय रमन के नेतृत्व में किया गया था। पान सिंह तोमर के खिलाफ यह मुठभेड़ 14 घंटे तक चली थी।

खौफजदा फूलन देवी ने रख दी थी ये शर्त

आइपीएस विजय रमन का ग्वालियर-चंबल से खास नाता रहा। दरअसल लोगों के दिल और रूह को कंपा देने वाले चंबल के इलाके में मौजूद डकैतों में आइपीएस विजय रमन का ऐसा खौफ था कि इसका उदाहरण आप डकैत फूलन देवी की इस शर्त को मान सकते हैं। दरअसल जब डकैत फूलन देवी ने आत्मसमर्पण किया था तो, उस वक्त फूलन देवी ने विजय रमन की जगह किसी और को भिंड का एसपी बनाने की शर्त रख दी थी।

ये भी जानें

- आइपीएस विजय रमन कई आतंकरोधी और नक्सलरोधी अभियानों का हिस्सा रहे हैं।
- आइपीएस विजय रमन ने मध्य प्रदेश पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और रेलवे पुलिस के साथ भी काम किया था।

- सन 2003 में श्रीनगर में सीमा सुरक्षा बल के आइजी के रूप में तैनात रहे विजय रमन ने 10 घंटे की चुनौतीपूर्ण मुठभेड़ का नेतृत्व किया। इस मुठभेड़ में विजय रमन ने संसद हमलों का मास्टरमाइंड और खतरनाक आतंकवाद गाजी बाबा को भी मार गिराया गया था।

- 1984 में, भोपाल में स्पेशल ब्रांच एसपी के रूप में उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के दौरान पीड़ित नागरिकों को बचाने और उनके पुनर्वास में सक्रिय भूमिका निभाई।

- उन्होंने अपनी समझदारी से चंबल में आतंक का पर्याय बन चुकी डकैत फूलन देवी और मलखान सिंह के आत्मसमर्पण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

- 1985 से 1995 तक, सहायक निदेशक और उप निदेशक, एसपीजी, दिल्ली के रूप में उन्होंने राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव सहित चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा संभाली।

- विजय रमन कई आतंकवाद विरोधी और नक्सल विरोधी अभियानों का भी हिस्सा रहे। उन्होंने एमपी राज्य पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और रेलवे पुलिस सहित कई विभागों में अपनी सेवाएं दीं।

- विजय रमन फरवरी 2011 में रिटायर्ड हो गए थे। रिटायरमेंट के बाद, वह पुणे में बस गए, लेकिन व्यापम घोटाले की जांच के लिए भोपाल में तैनात विशेष जांच दल के लिए उन्हें फिर चुन लिया गया।

- सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी विजय रमन को उनके साथी 'ऑपरेशन मैन' कहते थे।

- वे हमेशा आगे बढ़कर टीम को लीड करते थे। उनकी निर्णय लेने की क्षमता बहुत तेज थी।