29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तीन साल से मार्कशीट के लिए परेशान छात्र बेहोश होकर गिरा, नी रखी थी मार्कशीट नहीं दे रहे थे कर्मचारी

तीन साल से मार्कशीट के लिए परेशान छात्र बेहोश होकर गिरा, नी रखी थी मार्कशीट नहीं दे रहे थे कर्मचारी  

2 min read
Google source verification
jiwaji university

तीन साल से मार्कशीट के लिए परेशान छात्र बेहोश होकर गिरा, नी रखी थी मार्कशीट नहीं दे रहे थे कर्मचारी

ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी (जेयू) में पिछले तीन साल से मार्कशीट के लिए परेड कर रहा एक छात्र सोमवार को भूखा और बीमार होने के कारण छात्र सहायता केन्द्र पर बेहोश हो गया। छात्र के बेहोश होने की खबर जैसे ही सुरक्षा प्रभारी राजवीर सिंह सेंगर को लगी वे अपने साथियों के साथ छात्र के पास पहुंचे और उसे उठाकर मुख्य द्वार के पास ले आए। और ग्लूकोज पिलाकर उसे होश में लाने का प्रयास किया। साथ ही मामले की जानकारी कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला और कुलसचिव डॉ.आनंद मिश्रा को दी।

इस छात्र का नाम संजीव रघुवंशी है। इसने पीजी कॉलेज गुना से 2013 में पीजी किया है। कर्मचारी छात्र को मार्कशीट के लिए ऊपर से नीचे घुमा रहे थे। छात्र बीमार और भूखा होने से कमजोरी के कारण बेहोश हो गया। छात्र के बेहोश होने की खबर जैसे ही कुलसचिव डॉ.आनंद मिश्रा को लगी तो उन्होंने एआर अभयकांत मिश्रा को निर्देश देकर छात्र की मार्कशीट बनाने के निर्देश दिए। एआर ने जब मार्कशीट का पता किया तो वह परीक्षा विभाग में बनी रखी मिली। कर्मचारियों को फटकार के बाद छात्र को मार्कशीट दी गई।

तीन परिवार हुए बर्बाद: जल्द लौट कर आऊंगा बोलाकर गए थे पापा, तीन लोगों का काल बनी तेज रफ्तार कार, VIDEO

फिर फेल हुई आकस्मिक चिकित्सा
जेयू में छात्रों को आकस्मिक चिकित्सा लाभ देने के लिए एम्बुलेंस के साथ ओपीडी की व्यवस्था की गई है, लेकिन जब कोई छात्र अचानक बीमार या बेहोश होता है तो उसे ओपीडी तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस होने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं है। जेयू के ई-रिक्शे को भी कबाड़ा करने के लिए पार्किंग में बंद कर दिया है।

हर दिन आते हैं 500 से 700 छात्र
जेयू में अपने रिजल्ट, मार्कशीट और डिग्री लेने के लिए करीब 500 से 700 छात्र जेयू आते हैं। लेकिन समस्या का समाधान पूरे दिन में 50 छात्रों का भी नहीं हो पाता है। विवि में कई कर्मचारी ऐसे हैं जो छात्रों से सुविधा शुल्क लेकर ही उनका काम करते हैं। अगर कोई छात्र शिकायत करता भी है तो अधिकारी अनसुना कर देते हैं।

Story Loader