
gwalior court
ग्वालियर. प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे बी.एड. डिग्रीधारकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने साफ किया कि कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए बी.एड. नहीं, डी.एड./डीएलएड. अनिवार्य योग्यता है। कोर्ट ने कहा, प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए बाल मनोविज्ञान की विशेष समझ और प्रशिक्षण जरूरी है। यह डी.एड. और डीएलएड पाठ्यक्रम का प्रमुख हिस्सा है। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने याचिकाकर्ता सुधा गुप्ता की रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने से अभ्यर्थी को नियुक्ति का स्वत: अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
कोर्ट की अहम टिप्पणी…
कोर्ट ने आदेश में कहा, प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाना सिर्फ विषय ज्ञान का नहीं, बल्कि उनके मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास को समझने का है। इसलिए इस स्तर के शिक्षकों के लिए बाल मनोविज्ञान और प्रारंभिक शिक्षण पद्धति का विशेष प्रशिक्षण आवश्यक है।
ये है मामला
याचिकाकर्ता ने 2011 में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 की पात्रता परीक्षा पास की। उनके पास बी.एड. की डिग्री थी। शिक्षा विभाग ने संशोधित नियुक्ति नियम-2008 का हवाला देते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था। नियमानुसार, प्राथमिक शिक्षक के लिए 50त्न अंकों के साथ हायर सेकंडरी व दो वर्षीय डिप्लोमा इन एजुकेशन (डी.एड./डीएलएड.) अनिवार्य है। विभाग के इस निर्णय को 2019 में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
Updated on:
24 Jun 2026 06:00 pm
Published on:
24 Jun 2026 06:00 pm
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