
ग्वालियर। दीपावली पर विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश पूजन, कुबेर पूजन और बही-खाता पूजन भी किया जाता है। दिवाली पर उपासक को अपने सामथ्र्य के अनुसार व्रत करना चाहिए. उपासक या तो निर्जल रहकर या फलाहार व्रत कर सकता है।मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने घर में घी के दिए जलाए थे और अमावस्या की काली रात भी रोशन हो गई थी। इसलिए दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाए जाते हैं। यहां हम आपको दीवाली के दिन पडऩे वाले मुहुर्त को बता रहें हैं। जिसे आप अपने अनुसार जिस भी मुहुर्त में पूजा करनाचाहते हैं। वह निम्नलिखित मुहुर्त मे से उपयोग में ला सकते हैं।
प्रदोष काल मुहूर्त
|
महानिशिता काल मुहूर्त
|
| चौघडिय़ा पूजा मुहूर्त | ||||||||
दीवाली लक्ष्मी पूजा के लिये शुभ चौघडिय़ा मुहूर्त
|
लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है।
Updated on:
06 Nov 2018 05:39 pm
Published on:
06 Nov 2018 05:37 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
