- लिवइन में 57 फीसदी को मिला धोखा, 18 माह में 299 रेप केस दर्ज
ग्वालियर। ठाणे (मुंबई) में सरस्वती वैद्य और दिल्ली में श्रद्धा वालकर की नृशंस हत्याएं पूरे देश को दहला चुकी हैं। इन महिलाओं की उन वहशियों ने बेरहमी से टुकड़े-टुकड़े कर हत्याएं की जिन्हें यह महिलाएं बिना फेरे (लिव इन) जीवन साथी बना चुकीं थीं। लिव इन में दरिंदगी की दास्तनों की फेरहिस्त और भी लंबी है। यह चलन अब अंचल में भी जड़ जमा रहा है। इसका असर महिलाओं के साथ अपराधों की गिनती पर दिख रहा है। पिछले 18 महीने में पुलिस ने 299 बलात्कार केस दर्ज किए हैं। इनमें 57 प्रतिशत मामलों में लिव इन में धोखा खा चुकी महिलाओं ने दर्ज कराए हैं।
केस -1
शिवपुरी से पढ़ाई के लिए ग्वालियर आई युवती राजस्थान के कारोबारी हिमांशु के साथ बिना फेरे जीवन बिताने के चलन में धोखा खा गई। तब उसने पुलिस से खुलासा किया हिमांशु ने उसे गुरुग्राम में लिव इन में रखा। उसका शारीरिक शोषण किया। लेकिन शादी के लिए राजी नहीं हुआ। बल्कि दूसरी युवती से शादी करने वाला था। जिस दिन बारात ला रहा था तब पीड़िता ने हिम्मत कर उसकी करतूतें उजागर कीं। रेप केस का पता चला तो बारात नहीं आई।
केस -2
उपनगर ग्वालियर में 45 साल की महिला को 20 साल छोटे लिव इन पार्टनर ने धोखा दिया। उसने उम्र में बड़ी विधवा प्रेमिका से शादी का वादा किया। 5 साल तक उसके लिव इन में रहा। फिर उसे पत्नी बनाने से मना कर दिया।
लिव इन में बढ़ाया शारीरिक शोषण के अपराधों का ग्राफ
महिला सुरक्षा डीएसपी हिना खां का कहना है लिव इन का चलन बढऩे से महिलाओं के शारीरिक शोषण की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले साल बलात्कार के 200 केस दर्ज हुए थे। इस साल अभी तक 99 अपराध दर्ज हो चुके हैं। इनमें करीब 57 प्रतिशत केस में पीड़िताएं लिव में धोखा खाने के बाद पुलिस के पास आई हैं। ज्यादातर मामलों में पीड़िताओं की कहानी एक ही है, पढ़ाई के लिए शहर के बाहर जाने पर लिवइन पार्टनर से पीड़िताओं की मुलाकात और दोस्ती हुई फिर बालिग होने का आधार बताकर दोनों रिलेशनशिप में आ गए। कुछ समय बाद पार्टनर का रिश्ते से मोहभंग तो पीड़िताएं ठगी गईं।
जिम्मेदारी तय होना जरूरी
रिटायर्ड एसपी जेपी शर्मा का कहना है लिव इन का चलन समाज के लिए घातक है। क्योंकि ऐसे रिश्ते में परिपवक्ता और भरोसे की बुनियाद नहीं होती। उसी वजह से महिलाओं के साथ घटनाएं बढ़ी हैं। सामाजिक रीति रिवाज से होने वाले विवाह में परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी रहती है। इस चलन पर रोक जरूरी है। इसके लिए परिवार और समाज की जिम्मेदारी तय होना चाहिए। जल्दबाजी में साथ जीवन बिताने के जो फैसले रहे हैं वह सिर्फ उनके हैं। इसमें परिवार और समाज की भागीदारी नहीं होती। इसलिए रिश्ते टूटने पर अपराध की बढ़ते हैं।
बलात्कार केस
2022- 200
2023- 99