
म.प्र पुलिस के इस थाना प्रभारी पर हुआ लूट-डकैती का मामला दर्ज, जाना जाता है अपने सिंघम स्टाइल के लिए
डबरा। वर्ष 2016 में डबरा सिटी थाना में तैनाती के दौरान रत्नेश यादव ने मकौड़ा निवासी सतीश सिकरवार के पुत्र गोविंद सिकरवार को झूठे मामले मे फंसाने को लेकर 50 हजार रुपए लिए थे। इस संबंध में गोविन्द सिकरवार ने सिविल न्यायालय डबरा में प्राइवेट इस्तगासा दायर किया। विशेष न्यायालय में न्यायाधीश रूपेश शर्मा ने थाना प्रभारी रत्नेश यादव सहित आरक्षक विवेक कौरव को दोषी मानते हुए लूट-डकैैती का मामला दर्ज किया है।
मकौड़ा निवासी सतीश सिंह सिकरवार के खिलाफ सिटी थाने मे फर्जी दस्तावेज तैयार करने के चलते धोखाधड़ी का मामला दर्ज था। मामले में 16 जून 2016 को कोर्ट में उन्होंने सरेंडर किया। जिस पर सिटी थाने में उन्हें गिरफ्तार किया गया। उस समय उनसे मिलने उनका बेटा गोविंद आया तब सिटी थाने में पदस्थ टीआई रत्नेश यादव ने गोविंद को भी लॉकअप में बंद करने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और इसके एवज में 50 हजार रुपए की मांग की। गोविंद ने 30 हजार रुपए थाने के सामने स्थित एचडी एफसी बैंक के एटीएम से आरक्षक विवेक कौरव के साथ निकलवाए थे और टीआई ने कुल 50 हजार रुपए लेकर गोविंद को जाने दिया।
इस संबंध मे गोविन्द ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से की जिसके चलते एसडीओपी सुधीर सिंह कुशवाह ने मामले की जांच की जिसमें दोनों थाना प्रभारी रत्नेश यादव व आरक्षक विवेक कौरव को दोषी माना था। इसी दौरान गोविन्द ने न्यायालय में प्राइवेट इस्तगासा दायर किया जिसके चलते विशेष न्यायाधीश रूपेश शर्मा ने मामले में तत्कालीन एसडीओपी सुधीरसिंह कुशवाह समेत अन्य के कथन लिए और उनकी गवाही पर थाना प्रभारी रत्नेश यादव और आरक्षक विवेक कौरव के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी वारंट जारी किए है।
Published on:
8 Sep 2018, 2:56 PM IST
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