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मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, घाटों पर लगाई आस्था की डुबकी

ग्वालियर चंबल में धूमधाम के साथ मनाया गया मकर संक्रांति का त्योहार

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मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, घाटों पर लगाई आस्था की डुबकी

ग्वालियर। मकर संक्रांति का त्योहार बुधवार को ग्वालियर चंबल में धूमधाम के साथ मनाया गया। दतिया जिले के बसई से लगभग 2 किलो मीटर दूर वेतवा नदी के तट पर स्थित प्राचीन भेरारेस्वर मंदिर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मकर संक्रांति के अवसर पर मेले का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने वेतवा नदी में स्नान करने वहीं गुफ़ा में बिराजमान भगवान चौमुखानाथ के दर्शन करके पुन्य लाभ प्राप्त किया।

वहीं कुछ भक्तों के द्वारा भण्डारे का भी आयोजन किया जा रहा था, जिसमें आने वाले श्रद्धालुओं को खिचड़ी का भोग दिया जा रहा था। कलेक्टर के निर्देश पर बसई थाना पुलिस की पूरे समय बराबर मेले पर नजर टिकाए रहे। वहीं संबंधित अधिकारियों ने नदी की गहराई अधिक होने से डुबकी लगाने बारे नदी में अधिक गहराई में न जा सके इस नदी के किनारे रस्सी बांध रखी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वेतवा नदी के तट पर स्थित प्राचीन भेरारेस्वर मंदिर के दर्शन के लिए इस बार कड़े इंतजाम किए गए थे। इस दौरान गुफा में दर्शन करने के लिए एक एक भक्त को अंदर जाने दिया जा रहा था। जिससे किसी भी श्रद्धालुओं के साथ कोई दुर्घटना न हो। इसके साथ ही मंदिर परिसर सहित अन्य जगहों पर सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात की गई थी।

पवित्र नदी में स्नान करना होता है शुभ
सूर्य का मकर राशि में आगमन 14 जनवरी मंगलवार की मध्य रात्रि के बाद रात 2 बजकर 7 मिनट पर हो रहा है। मध्य रात्रि के बाद संक्रांति होने की वजह से इसका पुण्य काल अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दोपहर तक होगा। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी भुलाकर उनके घर गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान,दान,पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन से मलमास खत्म होने के साथ शुभ माह प्रारंभ हो जाता है।

इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ एच जैन ने बताया कि जहां तक इस पर्व से जुड़ी विशेष बात है तो मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तर की ओर बढऩे लगता है जो ठंड के घटने का प्रतीक है। इस बार तो मकर संक्रांति का पर्व महाकुम्भ के अवसर पर पड़ रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राशि के शासक थे। पिता और पुत्र आम तौर पर अच्छी तरह नहीं मिल पाते इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का एक मौका बनाते हैं।

तिल-गजक की मांग बढ़ी
मकर संक्रांति का दिन नजदीक आते ही तिल-गुढ़ और गजक की मांग बढ़ गई है। शहर में जगह-जगह गजक की दुकानें लग गई हैं। इस दिन गजक का बहुत महत्व है।

दान करना पुण्यकारी
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन खिचड़ी का दान देना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। देश के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विशेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है। इस पर्व पर उत्तर प्रदेश में खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व होता है।