
जिले में नाम मात्र के खेल प्रशिक्षक, कैसे निखरे खिलाडिय़ों की प्रतिभा
धार. खेलों को कूदोंगे तो बनोंगे खराब, पढोंगे-लिखोंगे तो बनोंगे नवाब...इसी तरह की सीख किसी जमाने में माता-पिता बच्चों को देते थे। लेकिन आज वह दौर नहीं रहा। खेल जगत में ओलंपिक समेत अन्य खेलों में हमारे खिलाड़ी तिरंगा का मान बढ़ा चुके हैं। स्पोट्र्स में धार की पहचान बैडमिंटन हब के रूप में होती है। लेकिन इस खेल को छोड़ दें, तो जिले में बाकी गतिविधियां नहीं के बराबर है। इसका मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में मैदान समेत खेल प्रशिक्षकों की कमी है। इससे ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।जिला क्रीडा अधिकारी राधेश्याम गढ़वाल बताते हैं कि जनजाति विकास विभाग में सुविधा अनुसार बच्चों को खेलों की बारीकियां सिखाई जा रही है। जिले में सरदारपुर में खेल परिसर है। जहां से ज्योति चौहान और चेतना मारु फुटबॉल में राष्ट्रीय स्तरीय पर जिले का नाम रोशन कर चुकी है। ज्योति यूरोप में होने वाले नेशनल गेम्स की तैयारी कर रही है।
ट्रायबल में महज 66 स्पोट्र्स टीचर
जनजाति विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में प्रायमरी, मिडिल और हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों की संख्या लगभग 3700 है। वहीं इनके मुकाबले 66 खेल प्रशिक्षक पदस्थ हैं। इनमें भी 20 ही नियमित हैं। खिलाडिय़ों को टेंड करने के लिए विशेष ट्रेनर जिलेे में नहीं है। पिछले सालों में संविदा संवर्ग से कुछ शिक्षकों की भर्ती हुई, किंतु शिक्षकों के पास खेलों को लेकर पर्याप्त अनुभव नहीं है। शासन स्तर से यदि प्रशिक्षित दिया जाए तो खेल शिक्षकों की कमी दूर हो सकती है।
सरकार ने शुरू किया खेलों इंडिया अभियान
केंद्र सरकार ने ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल खेलो इंडिया अभियान शुरू किया था। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खेल गतिविधियां हुई थीं। मप्र के खिलाडिय़ों ने 96 मेडल जीते थे। जिसमें शिरकत करते हुए धार जिले से चेतना मारु थर्ड पोजिशन पर रहते हुए मेडल जीता था। शासन स्तर से खेलो इंडिया अभियान में खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन के साथ नकद ईनाम भी प्रदान किया गया था।
फैक्ट फाइल...
खेल प्रशिक्षक
क्रिकेट हां
बैडमिंटन हां
फुटबॉल हां
खो-खो हां
बॉक्सिंग नहीं
हॉकी हां
स्वीमिंग नहीं
जिम्नास्टिक नहीं
धार में ट्रेनिंग की सुविधा, फिर भी हम पीछे
शहर के इंदौर रोड पर जैतपुरा में सांई खेल प्राधिकरण सेंटर की सुविधा है। यह सौगात तत्कालीन केंद्रीय खेल मंत्री विक्रम वर्मा ने दी थीं। जिसका शुभारंभ 1996 में महान क्रिकेटर कपिल देव ने किया था। सेंटर पर देशभर के कई खिलाड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। फिर भी हमारे खिलाड़ी खेलों में अन्य प्रदेशों के मुकाबले पीछे है।
ये है जिले की स्थिति
-2800 प्रामयरी शाला
-746 मिडिल स्कूल
-149 हाईस्कूल
-100 हायर सेकंडरी शाला
-66 पीटीआई
खिलाडिय़ों की जुबानी परेशानी...
बैडमिंटन की ट्रेनिंग
बैडमिंटन मेरा पसंदीदा गेम्स है। राज्य स्तर पर भाग लिया। कोरोना के बाद खेलना बंद हो गया। अन्य खेलों को भी बढ़ावा मिलना चाहिए, ताकि हर खिलाड़ी को आगे बढऩे की प्रेरणा मिल सके।
निधि यादव, खिलाड़ी
ग्रामीण क्षेत्र में सुविधा नहीं
ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल स्तर पर खेल मैदान सहित ट्रेनर की सुविधा नहीं है। जिससे खिलाडिय़ों को अपना प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पाता। खासकर महिला खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
काली निनामा, खिलाड़ी
एक्सर्ट व्यू
गेम्स टीचर नियुक्त हो...
खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी बजट मिलता है। लेकिन कई स्कूलों में मैदान और गेम्स टीचर नहीं है। पंचायत स्तर पर मैदान तैयार होना चाहिए। वहीं संकुल में व्यायाम शिक्षक की नियुक्त हो, तो खिलाडिय़ों को विशेष प्रशिक्षण मिल सकता है।
शमशेरसिंह यादव, विशेषज्ञ
शासन को लिखा है
विभाग में नियमित खेल शिक्षक (पीटीआई) के कई पद खाली है। कई स्कूलों में स्पोट्र्स टीचर नहीं है। जिन संस्थाओं में पदस्थापना है, वहां खेल गतिविधियां हो रही है। शासन को पत्र लिखा है।
एके पाठक, सहायक संचालक जनजाति विकास विभाग, धार
Published on:
03 Aug 2023 09:43 pm
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