
Model College
ग्वालियर। प्रदेश में एजुकेशन सिस्टम में सुधार लाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग नया प्रयोग करने जा रहा है। अब सीएम राइज की तर्ज पर सूबे के हर जिले में एक मॉडल कॉलेज खोला जाएगा। ग्वालियर में मॉडल कॉलेज के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जगह चिह्नित की जा रही है। जगह चिह्नित होने के बाद आगामी बजट में कॉलेजों के लिए धनराशि आवंटित की जा सकेगी। मॉडल कॉलेज को बनाने में लगभग 5 साल का समय लग सकता है।
खोले जाएंगे मॉडल कॉलेज
विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में इन मॉडल कॉलेजों को खोला जा रहा है। मॉडल कॉलेजों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइब्रेरी, हॉस्टल और खेलकूद की आधुनिक व्यवस्था की जा सकेगी। प्रदेश के शासकीय स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए सीएम राइज मॉडल लाया गया था, अब उसी आधार पर शासन द्वारा संचालित कॉलेजों की स्थिति अच्छी न होने के चलते मॉडल कॉलेजों को खोला जाएगा। सीएम राइज की ही तरह कुछ जगह शासन के ही पुराने कॉलेजों को मॉडल कॉलेजों का रूप दिया जाएगा। और वहां विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं की होगी तैयारी
मॉडल कॉलेजों में आधारभूत संरचना के साथ विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की भी व्यवस्था की जाएगी। जहां छात्र शोध आदि भी कर सकेंगे। इसके लिए कॉलज मे लैब आदि की भी व्यवस्था की जा सकेगी। मॉडल कॉलेजों में व्यवस्थाओं को देख शहर के अन्य कॉलेज भी अपनी संरचना में परिवर्तन लाएंगे। इसके लिए वे जनभागीदारी समिति और एलुमिनाई से मिली मदद से छात्रों को सुविधा मुहैया कराएंगे। इसके लिए आयुक्त स्तर पर उनकी निगरानी भी की जाएगी। साथ ही इन कॉलेजों में भी आधारभूत संरचना के साथ ई-पुस्तकालय, छात्रावास, वर्चुअल लैब और रिसर्च फैकल्टी आदि की व्यवस्था भी जाएगी।
विभागीय अधिकारियों द्वारा मॉडल कॉलेजों को लेकर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। आगामी बजट में कॉलेजों के लिए धनराशि आवंटित की जा सकती है। अभी शहर में भी कॉलेज के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। बजट पास होते ही कॉलेज निर्माण पर काम शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही अन्य शासकीय कॉलजों की व्यवस्था में भी परिवर्तन किया जा सकेगा।
कुमार रत्नम, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग
कॉलेजों में होंगे नवाचार
मॉडल कॉलेजों में छात्रों को प्रोजेक्ट्स को लेकर नवाचार करने होंगे। साथ ही विद्यार्थियों की सुविधा के हिसाब से यहां गेस्ट फैकल्टी को भी रखा जाएगा। कॉलेजों में टीचिंग लर्निंग के साथ विद्यार्थियों के परिणाम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए छात्रों की हाजिरी, प्रोजेक्ट वर्क, असाइनमेंट आदि पर फोकस किया जाएगा। छात्रों का निरंतर और सतत मूल्यांकन हो सके, इसके लिए उन्हें नियमित टास्क भी दिए जाएंगे। इसी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कॉलजों में विषोषज्ञों को भी बुलाया जाएगा। विशेषज्ञों के साथ सामूहिक चर्चा, मॉक टेस्ट आदि किया जाएगा।
Published on:
20 Feb 2023 05:37 pm
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