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ज्ञान सागर की कीर्ति, यश, तपस्या और उनके समर्पण से है मुरैना की पहचान: तोमर

एक से दूसरे छोर तक अगर देखेंगे तो हमें ध्यान आएगा कि हमारा मुरैना जिला वाकई साधु-संत और ऋषि मुनियों की तपस्थली रही है। इस पूरी धरती पर एक समय था, जब जैन ऋषि ज्ञान सागर महाराज का जन्म हुआ था।

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ज्ञान सागर की कीर्ति, यश, तपस्या और उनके समर्पण से है मुरैना की पहचान: तोमर

ज्ञान सागर की कीर्ति, यश, तपस्या और उनके समर्पण से है मुरैना की पहचान: तोमर

मुरैना. केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र तोमर ने कहा है कि चंबल की धरती ऋषि मुनि और तपस्वी की भूमि है। यह हमारा दुर्भाग्य रहा कि हमने कदर नहीं की। चंबल का क्षेत्र डकैतों के नाम से जाना जाने लगा, लेकिन एक से दूसरे छोर तक अगर देखेंगे तो हमें ध्यान आएगा कि हमारा मुरैना जिला वाकई साधु-संत और ऋषि मुनियों की तपस्थली रही है। इस पूरी धरती पर एक समय था, जब जैन ऋषि ज्ञान सागर महाराज का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि गर्व की बात है कि आज ज्ञान सागर महाराज मुरैना और चंबल क्षेत्र के हैं, लेकिन उनकी कीर्ति, उनका यश, उनकी तपस्या, उनका समर्पण, उनकी ईश्वर भक्ति और उनके द्वारा व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया पर जो बल दिया है। उसके कारण भी मुरैना को पूरे देश और दुनिया में जाना जाता है। केन्द्रीय मंत्री मुरैना में घिरोना मंदिर के समीप जैन मंदिर में आयोजित पंच कल्याणक महोत्सव में आशीर्वाद लेते समय कही।
उन्होंने कहा कि जैन मंदिर एक अपने आप में अदभुत स्थान है। आगे आने वाले कल में यह स्थान पूरे हिन्दुस्तान का ज्ञानतीर्थ होगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि महाराज जी गर्मियों के समय दो माह के लिये मुरैना उपस्थित रहते थे, तब कई बार देश के अनेक स्थानों में बच्चों की दो महीने की छुट्टियों में शिविर लगाते थे। जिसमें धर्म और आचरण की शिक्षा होती थी, योग्य व्यक्ति निर्माण के लिए और उसकी प्रगति के लिए शिक्षा दी जाती थी। केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है, क्योंकि शिविरों में जाकर महाराज जी के दर्शन किए और जो लाभ इस क्षेत्र को मिला। उस कालखंड में महाराज जी ने अपनी जन्मस्थली चंबल के आंचल में इस स्थान के निर्माण का संकल्प लिया था तो शुरुआती दौर में लोगों को लगता था कि संकल्प कैसे पूरा होगा, लेकिन हम सब जानते हैं कि संकल्प की ताकत समर्पण में होती है और जब समर्पण ईश्वर के चरणों में होता है तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। आज हम जिस स्थान पर बैठे हैं, वह स्थान सिर्फ एक मंदिर ही नहीं है, साक्षात भगवान विराजमान होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले कल में यह पूरे ङ्क्षहदुस्तान का ज्ञान तीर्थ के रूप में तब्दील होगा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर से दतिया की ओर चले जाओ तो सोनागिरी, मुरैना से अंबाह की तरफ सिहोनियां और ग्वालियर के तोमर कालीन किले में भीतर भगवान की मूर्तियां एक स्थान पर देखने को मिलती हैं। लेकिन इन सब स्थानों पर जब चंबल के आंचल पर ज्ञान सागर महाराज की प्रेरणा से यह ज्ञान तीर्थ बनने जा रहा है। आदिनाथ भगवान की प्रतिमा काफी योग्य हाथों से बनकर स्थापित हुई है। पंचकल्याणक महोत्सव चल रहा है आदिनाथ बाबा और अन्य भगवान की मूर्तियां का प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हो रहा है। जब यह कार्यक्रम पूरा होगा, तब यहां पर भगवान की मूर्ति नहीं होगी, बल्कि साक्षात भगवान ही होंगे। ऐसा हम सबका विश्वास होना चाहिए और पंचकल्याणक महोत्सव के बाद यह तीर्थ पूरे प्रदेश में देश का तीर्थ बनने जा रहा उसका लाभ सबको मिलेगा। इस अवसर पर रघुराज ङ्क्षसह कंषाना, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. योगेशपाल गुप्ता, कलेक्टर अंकित अस्थाना, नगर निगम कमिश्नर संजीव कुमार जैन, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हमीर ङ्क्षसह पटेल, समाजसेवी जिनेश जैन सहित समाजबंधु मौजूद रहे।