
Gwalior Bench of the High Court (Photo Source - Patrika)
MP Highcourt- राजस्व रेकॉर्ड में गलत प्रविष्टि के मामले में बर्खास्त किए गए एक पटवारी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट MP Highcourt ने सख्ती दिखाई है। ग्वालियर खंडपीठ ने उसे राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट कहा कि किसी कर्मचारी का आपराधिक मामले में बरी हो जाना मात्र इस बात का आधार नहीं है कि उसके खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई स्वत: समाप्त हो जाए या उसे सेवा में बहाल कर दिया जाए। खंडपीठ ने बार-बार एक ही राहत के लिए याचिका दायर करने को अनुचित मानते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया। इसी के साथ जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने विश्राम सिंह कुशवाह की अपील खारिज कर दी।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टि के मामले में बर्खास्त किए गए पटवारी को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपराधिक मामले में बरी हो जाने मात्र से विभागीय कार्रवाई स्वत: समाप्त नहीं हो जाती और कर्मचारी को सेवा में बहाल करने का अधिकार स्वत: नहीं मिलता। बार-बार याचिका दायर करने पर 10 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने विश्राम सिंह कुशवाह द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को सही ठहराया।
याचिकाकर्ता को वर्ष 2016 में राजस्व अभिलेख में गलत नाम दर्ज करने के आरोप में विभागीय जांच के बाद सेवा से
बर्खास्त कर दिया गया था। इसी मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरण में वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट से उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था, जिसके आधार पर उसने पुन: सेवा में बहाली की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दोनों अलग-अलग प्रकृति की कार्रवाई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय दंड स्वत: समाप्त नहीं होता, विशेषकर तब जब बरी होना संदेह का लाभ मिलने के कारण हुआ हो।
ज्ञात है कि पटवारी विश्राम सिंह कुशवाह जिला शिवपुरी में पदस्थ था। वहीं के एसडीओ, शिवपुरी ने विभागीय जांच के बाद 4 मई 2016 को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था।
Published on:
17 Mar 2026 09:21 am
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