
इस वर्ष नागपंचमी का पर्व 17 अगस्त को श्रावण माह के तीसरे सोमवार के साथ पडऩे से विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व प्राप्त कर रहा है।
ग्वालियर. इस वर्ष नागपंचमी का पर्व 17 अगस्त को श्रावण माह के तीसरे सोमवार के साथ पडऩे से विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व प्राप्त कर रहा है। ज्योतिषाचार्य हिमांशु-हुकुमचंद जैन के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी पर होने वाली नाग पूजा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ राहु-केतु और कालसर्प योग से जुड़ी बाधाओं की शांति के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु की प्रतिकूल स्थिति, कालसर्प योग या राहु-केतु की महादशा चल रही हो, वे इस दिन नाग देवता का पूजन, शिवलिंग का जलाभिषेक और राहु-केतु शांति मंत्रों का जप करें। तांबे के नाग का दान भी शुभ माना गया है।
प्रतीकात्मक रूप में करें नागदेवता का पूजन
नागपंचमी केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का भी संदेश देती है। वर्षा ऋतु में सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं, इसलिए उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। जीवित सांपों को दूध पिलाने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करना ही शास्त्रसम्मत और वैज्ञानिक दृष्टि से उचित माना गया है।
सावन में नाग पूजा का खास महत्व
सावन माह भगवान शिव की आराधना के साथ नाग देवता की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने नाग पूजा का विशेष महत्व रहता है।
नाग देवता मंदिरों पर लगेंगे मेले
नाग पंचमी के दिन शहर के अलग-अलग नाग मंदिरों पर मेले लगेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। छत्री बाजार स्थित नाग मंदिर क्षेत्र में बच्चों के लिए झूले व भक्तों के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। तारागंज, बहोड़ापुर, दौलतगंज के नाग मंदिरों में भी इस दिन मेले लगेंगे। इन सभी स्थानों पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित होंगे। नाग पंचमी के अवसर पर चौरसिया समाज के लोग नाग बेल और पान की पूजा करते हैं। इस दिन को समाज की ओर से चौरसिया दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। वहीं चौरसिया समाज विकास संघ की ओर से नागपंचमी के मौके पर प्रतिवर्ष चल समारोह निकाला जाता है, इस बार भी तैयाारियां की जा रही हैं।
Updated on:
06 Aug 2026 10:22 pm
Published on:
06 Aug 2026 10:20 pm
