अफसरों ने रहवासियों से कहा, जमीन खरीदने से पहले सोचना चाहिए था कि रजिस्ट्री नहीं है तो मालिकाना हक कैसे मिलेगा, 60 हजार रुपए में कहीं प्लॉट मिलता है। बहरहाल बेघर धूप में बिलखते बच्चों और बेहोश होती महिलाएं गवाही दे रहीं थी कि वे भू-माफियाओं की साजिश का शिकार हुए हैं। वहीं लोगों का कहना था कि जब हम बस रहे तो तो कोई रोकने नहीं आया अब हमारे सपने तोड़ दिए। गुरुवार को जिला प्रशासन ने 20 से अधिक मकान तोड़कर सरकारी भूमि को मुक्त कराया। इस दौरान एसडीएम महीप तेजस्वी, उपायुक्त एपीएस भदौरिया, क्लस्टर अधिकारी सतेंद्र यादव, भवन अधिकारी प्रदीप वर्मा, एवं टीआई रत्नेश तोमर मौजूद रहे।