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आंखों के सामने उजड़ गए आशियाने, वे बिलखते रहे ये बुल्डोजर चढ़ाते रहे

 साहब! मुख्यमंत्री जी ने कहा था- 'जो गरीब सरकारी जमीन पर झोपड़ी और मकान, पाटौर बनाकर रहे हैं उसके निर्माण को नहीं तोड़ा जाएगा, उन्हें पट्टे दिए जाएंगेÓ फिर आप हमारे घर क्यों तोड़ रहे हो। 

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Gaurav Sen

Jul 21, 2017

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ग्वालियर। साहब! मुख्यमंत्री जी ने कहा था- 'जो गरीब सरकारी जमीन पर झोपड़ी और मकान, पाटौर बनाकर रहे हैं उसके निर्माण को नहीं तोड़ा जाएगा, उन्हें पट्टे दिए जाएंगेÓ फिर आप हमारे घर क्यों तोड़ रहे हो। हमारे जीवन भर की पूंजी इस घर को बनाने में लग चुकी है, हमारे बच्चों का क्या होगा, हम तो बर्बाद हो जाएंगे। यह बात सिरोल रोड स्थित सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे जिला प्रशासन और नगर निगम अफसरों से पीडि़त महिलाओं और रहवासियों ने कही, लेकिन अफसरों ने सरकारी जमीन होने का हवाला देकर तुड़ाई की कार्रवाई को अंजाम दिया।

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अफसरों ने रहवासियों से कहा, जमीन खरीदने से पहले सोचना चाहिए था कि रजिस्ट्री नहीं है तो मालिकाना हक कैसे मिलेगा, 60 हजार रुपए में कहीं प्लॉट मिलता है। बहरहाल बेघर धूप में बिलखते बच्चों और बेहोश होती महिलाएं गवाही दे रहीं थी कि वे भू-माफियाओं की साजिश का शिकार हुए हैं। वहीं लोगों का कहना था कि जब हम बस रहे तो तो कोई रोकने नहीं आया अब हमारे सपने तोड़ दिए। गुरुवार को जिला प्रशासन ने 20 से अधिक मकान तोड़कर सरकारी भूमि को मुक्त कराया। इस दौरान एसडीएम महीप तेजस्वी, उपायुक्त एपीएस भदौरिया, क्लस्टर अधिकारी सतेंद्र यादव, भवन अधिकारी प्रदीप वर्मा, एवं टीआई रत्नेश तोमर मौजूद रहे।

इसलिए सस्ते प्लॉट
सरकारी भूमि पर बस्ती बसने के बाद नेता संरक्षण देते हैं, कार्रवाई नहीं हो पाती और भू-माफिया प्लॉटिंग कर देते हैं।
नगर निगम द्वारा बिल्डर्स को कॉलोनाइजिंग के लाइसेंस देने में देरी होती है। इससे अवैध कॉलोनियां कटती हैं।
जानकारी के अभाव में गरीब लोग सस्ते प्लॉट के लालच में आकर भू-माफियों की बात मानकर सरकारी जमीन पर ही प्लॉट खरीद लेते हैं। फिर बाद में उन्हें मालूम चलता है।


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24 घंटे में कार्रवाई
वर्षों से सिरोल रोड स्थित सरकारी जमीन को जोतकर दबंग फसलें लेते रहे, जब हाइवे निकला तो दूसरे लोगों को नोटरी कर प्लॉट 50 हजार से एक लाख रुपए में प्लॉट बेच दिए। 19 जुलाई को कलेक्टर राहुल जैन और निगमायुक्त विनोद शर्मा ने दौरा कर सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए थे, 24 घंटे के अंदर कार्रवाई की ग
जीवन भर से किराए से थे। सोचा सस्ते में प्लॉट लेकर बच्चों को पढ़ा लेंगे, मकान बनाया था। हमारी जीवन भर की पूंजी थी ये।
ब्रजलाल

गांव में पुरखों की जमीन बेचकर यहां आए थे ताकि बच्चे पढ़ें। एक लाख में राजेंद्र खरे से प्लॉट खरीदा। मेरे साथ कई परिवारों को जमीन बेची है।
श्रीलाल, निवारी नोन की सराय चीनोर