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National Camera Day: 15 मिनट में क्लिक होता था 1 फोटो, शूट कराने लगती थी लंबी लाइन

छह दशक पहले शहर में होते थे कुछ ही कैमरे, आज भी संभालकर रखे

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National Camera Day

ग्वालियर। कैमरा... कैमरा.... कैमरा...। इसका क्रेज पहले भी था और आज भी है। अंतर सिर्फ इतना है कि पहले कैमरे भारी भरकम, परदे और रील वाले होते थे। फोटो क्लिक कराने के लिए लम्बी लाइन लगती थी और आज हर जेब में कैमरा है। मोबाइल निकाला और कहीं भी कैमरा ऑन कर फोटो क्लिक करने लग गए। वे भी अच्छे रेजोल्यूशन के। जिसे कितना भी जूम करके देखा जा सकता है। कैमरे अब केवल मैरिज फंक्शन या वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफी के लिए रह गए हैं। समय के साथ चीजें बदली हैं। लेकिन आज भी यदि हम पुराने कैमरे के बारे में बात करें तो बहुत से किस्से और कहानियां सुनने को मिलते हैं। पुराने लोगों के अनुसार पहले शहर में बहुत कम कैमरे होते थे। फोटो खिचवाने के लिए लोग लाइन में लगा करते थे। उस समय फोटोग्राफर को समाज में बहुत सम्मान मिलता था। उनकी खूब मेहमाननवाजी हुआ करती थी।

फोटो एग्जीबिशन में रखे जाते हैं कैमरे

कुछ दशक पहले जिसके पास कैमरा होता था, वह बहुत धनाढ्य और सम्मानित व्यक्ति माना जाता था। उस दौरान दस-दस किलो वजन के कैमरे आते थे, जिनसे फोटो लेने में 15 मिनट का समय लगता था। लोगों में फोटो क्लिक कराने का इतना चार्म था कि लाइन लगती थी, आज भी कई दशक पुराने कैमरों को सहेजकर कुछ लोगों ने रखा है और उन्हें देखने के लिए स्टूडेंट्स पहुंचते हैं। कई बार फोटो एग्जीबिशन में भी ये कैमरे देखने को मिल जाते हैं।

मिनिट कैमरे का वजन था 10 किलो, फोटो का था जबरदस्त क्रेज

राम माहेश्वरी, बिजनेसमैन का कहना है कि मेरे चाचा सत्य नारायण माहेश्वरी मिनिट कैमरा से फोटो खींचते थे। उसका वजन 10 किलो होता था। वे छापाखाना के पीछे खड़े होते थे। उस समय उन्हीं से मुझे भी शौक लगा और मैंने स्कूल टाइम से ही कैमरा हाथों में थाम लिया। मैंने याशिका 120, निकोन एफएमटू, पेनटेक्स 1000 आदि से फोटो खींचे। मेरे पास आज भी 25 से अधिक पुराने कैमरे हैं। इन कैमरों को जब भी देखता हूं, तो पुराने दिन याद आ जाते हैं, जब फोटोग्राफर का अलग ही ग्लैमर होता था। लोग फोटोग्राफर को बहुत समृद्ध समझते थे और सम्मान देते थे।

सन् 1932 का है कैमरा, दादा जी की धरोहर को संभालकर रखा

फलित गोयल, आंत्रप्रेन्योर का कहना है कि मेरे दादा (हनुमान दास गोयल) के पास जेइस आइकॉन आइकांता कैमरा था, जिसे मैंने आज भी संभालकर रखा है। यह कैमरा आज भी रनिंग कंडीशन में है, लेकिन इसकी रील अब नहीं मिलती। यह कैमरा सन् 1932 का बना हुआ है। कैमरे में बड़े साइज की रील पड़ती है। एक रील में 16 फोटो निकलती थीं। इसमें टाइमर का भी ऑप्शन है और फोकस अर्जेस्ट भी किया जा सकता है। इसे फ्लेश सिस्टम से कनेक्ट कर सकते हैं। मैंने भी इसे बचपन में चलाया है। आज यह घर की शोभा बढ़ा रहा है।