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कचरे में मिली नवजात: मेरा क्या कसूर, मैं जीना चाहूती हूं मां, मुझ क्यों फेंक दिया

कचरे में मिली नवजात: मेरा क्या कसूर, मैं जीना चाहूती हूं मां, मुझ क्यों फेंक दिया

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new born found alive in gwalior

कचरे में मिली एक नवजात: मेरा क्या कसूर, मैं जीना चाहूती हूं मां, मुझ क्यों कचरे में फेंक दिया

ग्वालियर। मैंने तो ठीक से अभी अपनी आंखें भी नहीं खोली थीं...मुझे हमेशा के लिए सुलाने क्यों कचरे के ढेर में फेंक दिया। आखिर मुझसे पीछा छुड़ाने क्यों मुझे मरने के लिए छोड़ दिया मां? क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा? मैंने तो नौ महीने तुम्हारे गर्भ में गुजारे थे। मैं तुम्हारी ममता की गुदगुदाती गोद में सोने के सपने देखती रही.. मैं तुम्हारी छाती से चिपटकर अपने नवजात होने का एहसास करना चाहती थी मां।

तुम्हारी ऊंगली पकड़कर अपना बचपन खेलना चाहती थी। लेकिन, तुम मुझे कचरे के ढेर में छोड़कर चली गईं। मुझे यहां फेंकने से पहले, मेरी ओर देख तो लेती मां... अगर मुझे पालना ही नहीं था तो मुझे पैदा ही क्यों कि मां... जी हां, कचरे में पड़ी यह नवजात यदि बोल पाती तो अपनी मां से कुछ ऐसे ही सवाल पूछती।

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" मुरार जिला अस्पताल केएसएनसीयू में भर्ती है नवजातसांस लेने में दिक्कत और कम वजन के चलते हालत नाजुक"

अंधेरे में छोड़ गया
रविवार को फिर किसी निर्दयी मां ने नवजात बालिका को जन्म लेते ही मौत के हवाले कर दिया। उसने अंधेरे का फायदा उठाकर इस कृत्य को अंजाम दिया। हजीरा क्षेत्र स्थित झलकारी बाई कॉलेज के पास कचरे के ढेर में नवजात बालिका पड़ी मिली। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई।

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11.30 बजे पहुंची एसएनसीयू
एसएनसीयू मं नवजात बालिका को रविवार की सुबह 11.30 बजे पुलिस ने जिला अस्पताल मुरार में भर्ती कराया। बच्ची का वजन 1.64 किलोग्राम है। कचरे के ढेर में लम्बे समय तक पड़े रहने के कारण बच्ची संक्रमण की चपेट में आई गई। इससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे ऑक्सीजन दिया जा रहा है डॉक्टर उसकी देखरेख में लगे हुए हैं।