
oil prices
Oil Price: बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को महंगाई ने एक और बड़ा झटका दिया है। बाजार में खाद्य तेल पर आयात शुल्क बढ़ने के नाम पर कारोबारियों ने पिछले सात दिनों में दाम 20 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। इतना ही नहीं जिन व्यापारियों के पास पुरानी कीमत वाला स्टॉक है वे उसे भी बढ़ी हुई कीमत पर ही इसे बेच रहे हैं।
साल की शुरुआत में तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई थी। खाद्य तेलों के थोक कारोबारियों का कहना है त्योहारों से पहले ही तेलों की मांग निकल चुकी है और आने वाले त्योहारी सीजन में दामों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
रिफाइंड तेल के दाम 15 सितंबर को 105 रुपए प्रति लीटर थे, जो अब 125 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं।
सरसों तेल के दाम 15 सितंबर को 120 रुपए प्रति लीटर थे, जो अब 150 रुपए लीटर हो गए हैं।
केंद्र सरकार ने घरेलू तिलहन कीमतों को समर्थन देने के लिए सभी तरह के खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क में बढ़ोतरी कर दी थी। 14 सितंबर 2024 से प्रभावी, कच्चे सोयाबीन तेल, कच्चे पाम तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क 0 से बढ़ाकर 20% किया गया था।
इससे कच्चे तेलों पर कुल प्रभावी शुल्क 27.5% हो गया। केंद्र सरकार ने तेलों की कीमत जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अभी तक कई तेल कंपनियों ने अपनी कीमत नहीं बढ़ाई है। लेकिन शुल्क बढ़ने के अनुसार कारोबारियों ने पहले ही तेल की कीमत बढ़ा दी है। कई तेल कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने अभी तक नई प्राइस लिस्ट जारी नहीं की है। लेकिन कारोबारियों ने बढ़ी हुई कीमत वसूल करना शुल्क कर दिया है।
खाद्य तेलों के थोक कारोबारी अनिल पंजवानी ने बताया कि खाद्य तेलों में आयात शुल्क बढ़ने के कारण दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, आगे भी दामों में मंदी होती नहीं दिख रही है। शहर में रोजाना 100 से 120 टन खाद्य तेलों की खपत होती है। खेरिज किराना व्यवसायी संघ के अध्यक्ष दिलीप खंडेलवाल ने बताया कि त्योहार से पहले ही खाद्य तेल महंगे होने से आम आदमी की परेशानियां बढ़ गई हैं। पीछे से ही दाम महंगे होने के कारण फुटकर बाजार में भी तेल महंगा हो गया है।
Updated on:
26 Sept 2024 12:31 pm
Published on:
26 Sept 2024 12:30 pm
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