
भ्रष्टाचार के प्रकरण में फरियादी को झूठी गवाही देना भारी पड़ गया। विशेष सत्र न्यायालय ने फरियादी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया है, जबकि पंच गवाह को राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फरियादी द्वारा अदालत और लोकायुक्त कार्यालय में दिए गए बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं, जो प्रथम दृष्टया झूठी गवाही और गलत शिकायत की श्रेणी में आते हैं। इसी आधार पर न्यायालय ने फरियादी राजेन्द्र सिंह जादौन के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है, जबकि पंच गवाह अशोक कुमार श्रीवास्तव को राहत प्रदान की गई है
प्रकरण की शुरुआत 22 दिसंबर 2014 को हुई, जब ठेकेदार राजेन्द्र सिंह जादौन ने लोकायुक्त कार्यालय, ग्वालियर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पीडब्ल्यूडी संभाग क्रमांक-1 में पदस्थ बाबू प्रमोद गर्ग उर्फ प्रबुद्ध गर्ग ने स्कूल भवन निर्माण के भुगतान का चेक देने के बदले 7 हजार रुपए रिश्वत मांगी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सत्यापन और ट्रैप की प्रक्रिया शुरू की। वॉइस रिकॉर्डर, पंच गवाह और नोटों पर पाउडर लगाने जैसी औपचारिकताएं पूरी की गईं, लेकिन निर्धारित दिन आरोपी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ। बाद में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर विशेष न्यायालय में चालान पेश किया गया। अदालत ने 18 जुलाई 2022 को आरोपी प्रमोद गर्ग को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने पाया कि फरियादी और गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और रिश्वत मांग का आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सका।
झूठी गवाही पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश ने कहा कि फरियादी राजेन्द्र सिंह जादौन ने लोकायुक्त, पुलिस और न्यायालय के समक्ष अलग-अलग समय पर अलग-अलग तथ्य रखे। कभी आरोपी की पहचान को लेकर भ्रम, तो कभी रिश्वत की रकम और घटनाक्रम में बदलाव सामने आया। कोर्ट ने इसे जानबूझकर तथ्य बदलना और असत्य कथन माना।
-न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि फरियादी के विरुद्ध धारा 340/344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई बनती है। इसी आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ग्वालियर को फरियादी के खिलाफ झूठी गवाही और गलत आरोप से संबंधित परिवाद प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। पंच साक्षी को राहत दी है।
Published on:
30 Jan 2026 11:28 am
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