डिलिवरी के दौरान एक विधवा महिला की हालत बिगडऩे पर अरुण ने महिला को इलाज कराने और चुप रहने के लिए पैसे भी दिए थे। नदीपार टाल निवासी विधवा महिला ने इंट्रोगेशन में बताया उसके पति का करीब दो साल पहले निधन हो चुका है। परिचित से उसके संबंध हो गए। गर्भ ठहर गया तो डर था बच्चे का जन्म हुआ तो बदनामी होगी। इसलिए करीब 7 महीने के गर्भ की डिलिवरी कराने मुरार जच्चा खाने गई। यहां हालत बिगड़ गई। अस्पताल में पलाश अस्पताल के कई दलाल थे। उन्होंने वहां जाने की सलाह दी तो पलाश अस्पताल में गई। अरुण भदौरिया ने करीब 8 हजार रुपए में डिलिवरी कराने का ठेका लिया। भरोसा दिलाया जो बच्चा जन्मेगा उसे अस्पताल अपने पास रखेगा, फिर अनाथ आश्रम को सौंप देंगे। लेकिन डिलिवरी के दौरान उसकी हालत ज्यादा बिगड़ी तो अरुण भदौरिया भी डर गया। उसने डिलिवरी के बाद बेटा रख लिया और इलाज कराने के लिए करीब 8 हजार रुपए भी दिए।