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बेजुबानों को सर्दी से बचाने का उठाया बीड़ा

कड़ाके की ठंड में लोगों को जहां घरों में भी राहत नहीं मिल रही है वहीं बेजुबान जानवर खुले में ही घूमते हैं। शहर में कई लोग हैं जो कि इन बेजुबानों को सर्दी से बचाने का प्रयास कर रहे हैं, इनमें से ही एक हैं एडवोकेट विशाल त्रिवेदी जो कि इन जानवरों के लिए तिरपाल सिलवाकर उन्हें ओढ़ाते हैं।

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बेजुबानों को सर्दी से बचाने का उठाया बीड़ा

बेजुबानों को सर्दी से बचाने का उठाया बीड़ा

ग्वालियर. कड़ाके की ठंड में लोगों को जहां घरों में भी राहत नहीं मिल रही है वहीं बेजुबान जानवर खुले में ही घूमते हैं। असहाय सर्दी में भी यह कुछ बोल नहीं पाते हैं और सब कुछ सहते रहते हैं। शहर में कई लोग हैं जो कि इन बेजुबानों को सर्दी से बचाने का प्रयास कर रहे हैं, इनमें से ही एक हैं एडवोकेट विशाल त्रिवेदी जो कि इन जानवरों के लिए तिरपाल सिलवाकर उन्हें ओढ़ाते हैं।

पेशे से एडवोकेट विशाल त्रिवेदी के अनुसार उन्होंने ठंड से ठिठुरते जानवरों को देखा तो उनके मन में उनके लिए कुछ करने का ख्याल आया। इसलिए उन्होंने बाजार से जूट के बोरे खरीदे, इससे उन्होंने घर पर ही तिरपालनुमा बनवाया और जानवरों को ओढ़ाया। जिससे कि सर्दी से उनका बचाव हो सके। उनके अनुसार इनसान की तरह जानवर को भी सर्दी लगती है और गर्मी में गर्मी, लेकिन वह कह नहीं पाते हैं। कुछ जानवरों को जब ठंड में मरते देखा और खबरें सुनी कि ठंड से गायों की मौत हो रही है। इसके बाद ही उन्होंने सर्दी से बचाव के लिए यह कदम उठाया। सिर्फ सर्दियों में ही नहीं बल्कि पूरे साल जब भी उन्हें कोई पशु किसी परेशानी या बीमार मिलता है तो वह उसकी मदद को हमेशा ही तैयार रहते हैं। फिर भले ही वह राह चलते कुत्ता सड़क हादसे में घायल ही क्यों न हो गया हो वह सभी की मदद करते हैं।

विशाल के अनुसार उन्होंने जानवरों को जब तिरपाल ओढ़ाया तो लोगों ने उसे उतारकर अपने जानवरों को पहना दिया। यह गलत है, लोगों को तो आगे आकर खुद खुले आसमान में घूम रहे जानवरों की मदद करना चाहिए। वह कहते हैं कि गौवंश पर राजनीति हो रही है लेकिन इनकी दशा सुधारने के नाम पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए फिर चाहे वह गांव हो या फिर शहर।