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हाइटेक हुई ग्वालियर पुलिस: घटनास्थल से ही ऑनलाइन होगी जांच, विवेचकों को मिले 650 ई-टैबलेट

अपराधों की जांच को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में ग्वालियर पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। जिले में ई-विवेचना प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अब तक 650 ई-टैबलेट विवेचना अधिकारियों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इन टैबलेटों के माध्यम से अब घटनास्थल से ही जांच संबंधी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा सकेगी।
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ग्वालियर

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Prashant Kumar Sharma

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Updated: 28 Jun 2026, 6:25 PM IST

विवेचकों को मिले 650 ई-टैबलेट

PHOTO : AI

डिजिटल पुलिसिंग से विवेचना में आएगी पारदर्शिता और तेजी, आइजी और एसएसपी ने अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण

ग्वालियर। अपराधों की जांच को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में ग्वालियर पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। जिले में ई-विवेचना प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अब तक 650 ई-टैबलेट विवेचना अधिकारियों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इन टैबलेटों के माध्यम से अब घटनास्थल से ही जांच संबंधी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा सकेगी।

शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम के सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) अरविंद कुमार सक्सेना और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने थाना प्रभारियों एवं विवेचना अधिकारियों को ई-टैबलेट वितरित किए। इस अवसर पर अधिकारियों को ई-विवेचना प्रणाली के उपयोग और तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी दिया गया।

क्या है ई-विवेचना प्रणाली?
पुलिस जांच प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने की व्यवस्था।
घटनास्थल से ही केस डायरी और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा।
डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित और त्वरित संकलन।
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव।
कागजी कार्यवाही में कमी और समय की बचत।

आइजी अरविंद कुमार सक्सेना ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य हो गया है। ई-विवेचना प्रणाली के माध्यम से जांच से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरे किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि टैबलेट की मदद से घटनास्थल पर ही आवश्यक जानकारी दर्ज करना, दस्तावेज अपलोड करना, डिजिटल साक्ष्यों का संकलन और केस डायरी तैयार करना अब अधिक सरल और त्वरित होगा।

उन्होंने सभी सीएसपी और एसडीओपी को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र के थानों में ई-विवेचना प्रणाली की नियमित समीक्षा करें और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।

ई-टैबलेट से होंगे ये बड़े बदलाव
मौके पर ही ऑनलाइन केस डायरी तैयार होगी।
फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य तुरंत सर्वर पर अपलोड किए जा सकेंगे।
जांच की हर जानकारी मुख्य सर्वर पर रियल टाइम में अपडेट होगी।
न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रहेंगे।
जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी कम होगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप डिजिटल पुलिसिंग आज की प्रमुख आवश्यकता है। यह पहल पुलिसिंग को अधिक आधुनिक, जवाबदेह और जनहितैषी बनाएगी। तकनीक के प्रभावी उपयोग से न केवल विवेचना की गति बढ़ेगी, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि घटनास्थल से ही साक्ष्य और दस्तावेज अपलोड होने से जांच प्रक्रिया में होने वाला अनावश्यक विलंब समाप्त होगा। इससे पुलिस कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश
प्रत्येक विवेचना अधिकारी ई-टैबलेट का नियमित उपयोग सुनिश्चित करे।
सीएसपी और एसडीओपी स्तर पर ई-विवेचना की सतत समीक्षा हो।
डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और अपलोडिंग में लापरवाही न बरती जाए।
समयबद्ध जांच और पीड़ितों को त्वरित न्याय प्राथमिकता रहे।
तकनीक आधारित पुलिसिंग को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाया जाए।

ग्वालियर पुलिस की यह पहल प्रदेश में डिजिटल पुलिसिंग को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित विवेचना व्यवस्था से अपराध जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी, पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और न्याय प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।