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दोनों पैर खराब, व्हील चेयर से पहुंचकर प्राची ने लिया ‘अर्जुन अवार्ड’, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा राष्ट्रपति भवन

-हौसले की उड़ान को पंख मिले अर्जुन अवार्ड से, पैरा ओलंपिक में जीतना है पदक- तैराकी छोडकऱ पैरा कैनो को चुना और बदल गई प्राची की किस्मत

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Prachi Yadav

ग्वालियर। लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस कहावत को पैरा कैनो खिलाड़ी प्राची यादव ने सच साबित कर दिखाया। वालियर के बहोड़ापुर क्षेत्र में रहने वाली प्राची यादव के भले ही दोनों पैर खराब है, लेकिन खेलों में उसने ऐसा कर दिखा जिस पर सभी को नाज है। भारत सरकार ने प्राची की इस उपलब्धि को सराहा और उसे राष्ट्रपति ने उसे अर्जुन अवार्ड से नवाज कर उसके हौसले को नई उड़ान दे दी। अर्जुन अवार्ड हासिल कर एक लक्ष्य हासिल कर लिया है अब पैरा ओलंपिक में देश के लिए पदक जीत लक्ष्य है। यह बात प्राची यादव ने अर्जुन अवार्ड मिलने के बाद पत्रिका से बातचीत में कही।

एक सपना था जो पूरा हो गया

महज 9 साल की उम्र में बतौर एक्सरसाइज 2007 में तैराकी से प्राची जुड़ी थी। एलएनआईपीई के प्रो. वीके डबास ने प्राची को तैराकी का प्रशिक्षण दिया, लेकिन तैराकी में बेहतर प्रदर्शन नहीं होने पर प्रो. डबास प्राची को कैनो में जाने की सलाह दी, क्योंकि प्राची के हाथ काफी लंबे थे। इसके बाद वह भोपाल गई और वहां छोटे तालाब पर प्रैटिक्स शुरू की। प्राची ने 2019 में पहली बार देश के लिए देश के लिए गोल्ड और सिल्वर जीता।

इसके बाद 2020 में टोक्यो एशियन गेम्स में शामिल होने के लिए प्राची के पैसे नहीं थे, तब प्रो. डबास ने आर्थिक सहायता दिलवाई थी, इसके बाद तो प्राची ने पीछ मुडकऱ ही नहीं देखा। दिव्यांग प्राची ने अपनी विपरीत परिस्थितियों से लडकऱ पैरा गेम्स में एक अलग पहचान बनाई है।

वल्र्ड रैंकिंग में 10वां स्थान

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की पैरा केनो प्लेयर प्राची यादव ने न सिर्फ मध्य प्रदेश का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। पैरा केनो गेम्स वल्र्ड रैंकिंग में प्राची ने दसवां स्थान प्राप्त किया। पिछले साल प्राची को प्रधानमंत्री ने भी बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया था।