ग्वालियर। पड़ाव रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के रूप में शहर को दीपावली का तोहफा मिल सकता है। इस बीच दिन-रात चल रहे कामकाज के बीच रेलवे प्रबंधन ने लोक निर्माण विभाग को ये कहते हुए सकते में डाल दिया कि आगामी पांच साल तक का ब्रिज मेंटेनेंस और उसके ट्रैफिक संचालन का टैक्स पांच-पांच करोड़ रुपए अग्रिम तौर पर देना होगा। रेलवे ने तीस साल में सिर्फ मेंटेनेंस के लिए तीस करोड़ रुपए मांगे हैं।
जानकारी के मुताबिक रेलवे ने 37 करोड़ रुपए की तमाम लेनदारियों की फेहरिश्त लोक निर्माण विभाग को सौंपी है। इस मामले में क्षेत्रीय सांसद और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर ने हस्तक्षेप कर 12 जुलाई को नई दिल्ली में विशेष बैठक आमंत्रित की है। इस दौरान रेलवे का शीर्ष प्रबंधन भी मौजूद रहेगा। पड़ाव पर निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज की कुल लागत 49 करोड़ है। इसमें से 37 करोड़ रुपए की मांग विभिन्न मदों में रेलवे ने की है। इस मसले में लोक निर्माण विभाग बीच का रास्ता निकालना चाहता है। वह मांगी गई रकम में से केवल 18 करोड़ रुपए एकमुश्त देने को तैयार है। शेष राशि को वह अतार्किक बताकर खारिज करने की स्थिति में है। बता दें कि पुल का दो-तिहाई इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर एमके जादौन ने बताया कि रेलवे ने कुल 37 करोड़ रुपए मांगे हैं, उसमें से तकरीबन आधी राशि विभाग देने को तैयार है।
आरओबी का लाभ: मुरार और लश्कर उपनगर को जोडऩे वाले इस मार्ग से रोज करीब चालीस हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। पड़ाव आरओबी के शुरू होने के बाद यहां जाम की स्थिति शून्य हो जाएगी।
यहां बजट का अभाव
शहर में तीन आरओबी और भी प्रस्तावित हैं, इनमें विवेकानंद नीडम, यादव धर्मकांटा एवं एआईट्रिपलआईटीएम शामिल हैं। राज्य शासन ने इनमें से किसी को भी वित्तीय मंजूरी नहीं दी है। इसके वित्तीय प्रबंध के लिए विभागीय बजट के अलावा केन्द्र सरकार की योजनाओं मसलन सेतु संगम योजना, केन्द्रीय सड़क निधि के मद भी शामिल हैं।
विशेष फैक्ट
1. आरओबी की कुल लागत में 25 करोड़ रुपए निर्माण पर खर्च करने हैं।
2. 24 करोड़ रुपए का बजट रेलवे के लिए सुरक्षित है।
3. आरओबी पूरी तरह राज्य शासन और दूसरी मदों के पैसे से बनाया जा रहा है।
4. ट्रैक के ऊपर करीब 60 मीटर के मार्ग के लिए रेलवे को भुगतान करना है।