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VIDEO: राष्ट्र सेवा का अटल दीप बुझ गया, दिनभर चला मंदिरों में दुआओं का दौर,शाम को टूट गई आस

VIDEO: राष्ट्र सेवा का अटल दीप बुझ गया, दिनभर चला मंदिरों में दुआओं का दौर,शाम को टूट गई आस

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atal ji ka ghar

राष्ट्र सेवा काअटल दीप बुझ गया, दिनभर चला मंदिरों में दुआओं का दौर, शाम को टूट गई आस

ग्वालियर। जैसे ही शहर के सपूत भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य बिगडऩे की खबर फैली वैसे ही शहर भर में दुआओं का दौर शुरू हो गया। अटलजी के चाहने वाले और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोगों ने मंदिरों पर पूजापाठ और हवन कर उनकी लंबी उम्र की दुआ की कामना की। दिनभर लोग टीवी के आगे चिपके रहे और उनके हाल जानने को उत्सुक रहे। साथ ही भगवान से दुआ मांगते रहे कि अटलजी किसी तरह बच जाएं, लेकिन शाम को जैसे ही उनके निधन की खबर आई वैसे ही पूरे शहर के लोगों की आस टूट गई। उनके निधन से हर वर्ग मायूस हो गया। अटलजी के निधन से शहर ही नहीं पूरे देश के लिए अपूर्णीय क्षति हुई है।

विपक्षी भी उनका भाषण सुनने आते थे
अटलजी की जब भी सभा होती थी तो लोग ग्वालियर-चंबल संभाग के कोने-कोने से उनका भाषण सुनने खिंचे चले आते थे। उनका भाषण सुनने विरोधी नेता भी आते थे।

फिल्में देखने का भी शौक था अटलजी को
वाजपेयी जी को फिल्में देखने का भी शौक था। उन्होंने ग्वालियर की लगभग सभी टॉकीजों में पिक्चर देखीं। भाजपा नेता अजीत बरैया ने बताया कि रजिया सुल्तान फिल्म देखने के लिए उनके साथ स्कूटर पर गए थे।

जब अटलजी हुए भावुक
भारत रत्न अटलजी ने जब तीसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभाला तब प्रधानमंत्री निवास पर एक कार्यक्रम रखा गया था। यह कार्यक्रम ग्वालियर के मूर्धन्य पत्रकार मामा स्व माणिकचंद वाजपेयी के सम्मान में आयोजित किया गया था। समारोह में अटलजी ने कहा था कि आज मुझे अधिकार प्राप्त हो गया है आपके चरण वंदन का, और अटलजी ने जब मामाजी के चरण छुए तब दोनों की आंखों में आंसू थे।

स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे
ऑल इण्डिया स्टेशन मास्टर एंड असिस्टेंट मास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर भी पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी रह चुके हैं। वे झांसी मंडल में वर्ष 1965 से 1970 के बीच रहे। उन्होंने स्टेशन मास्टरों के लिए कई कार्य रेलवे द्वारा कराए। उन्होंने स्टेशन मास्टरों को उस समय अच्छी ड्रेस के साथ यूनिफॉर्म भी अच्छी दिलाने में काफी मदद की थी। इसके साथ कई बार उन्होंने स्टेशन मास्टरों की यूनियनों के साथ भी बैठकें आयोजित की।

सबसे करते थे समान व्यवहार
ग्वालियर. उनके 95 वर्षीय सहपाठी इकबाल खान ने बताया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मैं गोरखी विद्यालय में आठवीं से लेकर 11 वीं तक साथ-साथ पढ़े। यहां से हम एक साथ स्कूल के लिए जाते थे। उनमें भाषण देने का शौक शुरूआत से ही था। स्कूल से छुट्टी होने के बाद वे कभी-कभी गायब हो जाते थे, जिनको मैं उनके पिताजी के कहने पर ढूंढने भी जाता था। उनके लिए कई बार मैंने झूठ भी बोला। उनमें एक अच्छाई यह थी कि चाहें छोटा हो या बड़ा सबसे समान व्यवहार करते थे।

बेटियों को थीसिस कराई
मुझे अच्छी तरह ध्यान है मेरी बड़ी बेटी प्रमिला और साधना ने एक बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिनको बेटियां चाचा जी कहती थीं, उनसे कहा कि हमें थीसिस लिखवा दो, उन्होंने कहा कि योगेन्द्र मिश्रा से मिल लेना वह थीसिस लिखवा देंगे, मेरी बेटियों की थीसिस लिखवाई। प्रधानमंत्री काल के समय वाजपेयी हैदराबाद गए, वहां मेरी एक बेटी रहती थी, उसको मिलने के लिए बुलाया। जब भी वे यहां आते थे तो मेरी बेटियों से जरूर मिलते थे। हमारे यहां काफी बैठकें भी होती थी। मुझे भी नहीं पता था कि एक मास्टर का बेटा देश का प्रधानमंत्री बन जाएगा। जैसा कि उनके पड़ौसी माखन लाल की 85 वर्षीय पत्नी कमला मिश्रा ने बताया