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Sawan 2023: सुरभि, रोशनी ने भगवान शिव से किया विवाह, जानिए क्यों चुना ये रास्ता ?

-माउंट आबू में 450 युवतियों ने की शिव से शादी-सुरभि, रोशनी व गायत्री भगवान शिव से विवाह कर बनीं ब्रह्माकुमारी

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Sawan 2023

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू, शांतिवन में देशभर की 450 युवतियों के साथ ग्वालियर की भी तीन बेटियों सुरभि, रोशनी व गायत्री ने भगवान शिव से विवाह किया। इसके बाद वह सदा के लिए ईश्वरीय सेवा में समर्पित हो गईं।

ईश्वरीय कार्य में समर्पित युवतियां डॉक्टर, इंजीनियर

भगवान शिव से विवाह कर ईश्वरीय कार्य के लिए खुद को समर्पित करने वाली सुरभि और रोशनी वैसे तो सागर जिले की व गायत्री महोबा जिले की रहने वाली हैं, लेकिन कई वर्षों से ग्वालियर के ब्रह्माकुमारी केंद्र पर रहकर सेवा कर रही थीं। इनके साथ भगवान शिव से विवाह करने वाली अन्य युवतियां समाज डॉक्टर, इंजीनियर, एमटेक, एमएससी, फैशन डिजाइनर, स्कूल शिक्षिका आदि हैं। इस अवसर पर बेटियों के अभिभावकों का कहना था कि हम भाग्यशाली हैं कि हमारी बेटी समाज कल्याण के लिए संयम का मार्ग अपना रही है। कार्यक्रम में सभी बेटियों ने सात फेरों के साथ सात संकल्प लिए। इसके साथ उनके माता-पिता ने भी संकल्प लिए। ब्रह्माकुमारी के स्थापना वर्ष 1937 से लेकर अब तक 50 हजार से अधिक बहनें भगवान से विवाह कर समाज को समर्पित हो चुकी हैं।

ईश्वरीय सेवा के लिए चुना ये मार्ग

ग्वालियर की रोशनी ग्रेजुएशन कर ईश्वरीय सेवा में समर्पित हुई हैं। वह कहती हैं कि लोग छोटी-छोटी बातों में दुखी और अशांत हो जाते हैं, वहां पर ब्रह्माकुमारी बहनें समाज में खुशियां बांट रही हैं। मुझे लगा मैं भी इन जैसी सेवा करूं। माता-पिता से अनुमति मिली तो इस राह पर चल पड़े।

आमजन की सेवा करना चाहती हूं

ग्वालियर की सुरभि बी.कॉम कर ईश्वरीय सेवा में समर्पित हुई हैं। वह कहती हैं कि मेरा जन्म धार्मिक परिवार में हुआ। बचपन से ही मुझे एक अच्छी राह पर चलना और सबका भला करना, कभी झूठ नहीं बोलना किसी को दुख नहीं देना सिखाया गया। मैं भोलेनाथ की सच्ची पार्वती बनकर आमजन की सेवा करना चाहती हूं।

पांच साल सेवा केंद्र पर रहने पर चयन

राजयोग मेडिटेशन कोर्स के बाद छह माह तक नियमित सत्संग, राजयोग ध्यान के अभ्यास के बाद सेंटर इंचार्ज दीदी की ओर से सेवाकेंद्र पर रहने की अनुमति दी जाती है। तीन साल तक सेवाकेंद्र पर रहने के दौरान संस्थान की दिनचर्या और गाइडलाइन का पालन करना होता है। बहनों का आचरण, स्वभाव, व्यवहार देखा-परखा जाता है। इसके बाद ट्रॉयल के लिए मुख्यालय शांतिवन के लिए माता-पिता का अनुमति पत्र भेजा जाता है। ट्रॉयल पीरियड के दो साल बाद ब्रह्माकुमारी के रूप में समर्पण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद ब्रह्माकुमारी के रूप में सेवाएं देती हैं।