
ग्वालियर। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित में 1980 से लेकर अभी तक लगभग ५३ करोड़ रुपए के गबन के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में एफआइआर भी हुई, तत्कालीन बैंक अध्यक्ष के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज हुआ, लेकिन 2007 से 2014 तक हुईं आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में शासन, प्रशासन और पुलिस ने उदासीन रवैया अपना लिया है। इसी तरह ग्वालियर विकास प्राधिकरण ने 26 फाइलों में दर्ज घोटाले के दस्तावेज न मिलने की बात कहकर किनारा कर लिया है। वॉटरशेड के अंतर्गत गांवों में हुए कामों में 60 फीसदी से ज्यादा सरकारी धन हड़पने की खबर है। इन सभी की जांच बीते कई सालों से जारी है।
बैठक पर बैठक
बीते दो सालों में ही इन मामलों पर चर्चा के लिए 26 से अधिक बार अधिकारियों की बैठक , 4 बार प्रभारी मंत्री की बैठक और एक दर्जन से अधिक बैठकें संभागायुक्त के द्वारा ली जा चुकी हैं। सभी बैठकों में सख्त कार्रवाई के निर्देश देकर वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्तव्य पूरा कर लिया, जबकि जनता के धन को हड़पने वाले कॉलोनाइजर, बैंक अधिकारी/नेता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका।
रेलवे कॉलोनी में बोरिंग फेल
ग्वालियर। शहर में दिनों-दिन पानी की समस्या बढ़ रही है। लोको स्थित रेलवे कॉलोनी में तीन बोरों से पानी उतरने से वहां पानी का संकट खड़ा हो गया है। पिछले चार-पांच दिनों से पानी को लेकर रेलवे कर्मचारी काफी परेशान हैं। इस क्षेत्र में एक टंकी से भी कॉलोनी में सप्लाई की जाती है, लेकिन पानी न आने से टंकी भी खाली हो गई है। इस क्षेत्र में रेलवे के कई क्वाटर बने हुए हैं। पानी की कमी के चलते अब कर्मचारी नगर निगम के टैंकरों पर ही निर्भर हैं। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि रेलवे के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
जीडीए
आवासीय भूमि विकसित करने , ग्रह निर्माण समितियों को जमीन दी गई।
इसमें नियमों का पालन न कर समितियों ने आमजन और शासन दोनों से धोखाधड़ी की।
शुरुआती जांच में २६ समितियों के दस्तावेजों में धांधली सामने आई।
समितियों की फाइलों को जांच में ले लिया गया। अब यह फाइलें गायब बताई जा रही हैं।
अंदेशा है कि इन फाइलों का रहस्य खुलेगा तो जीडीए के तीन अध्यक्ष और कई अधिकारी-कर्मचारी लपेटे में आएंगे।
पीएचई
ग्रामीण क्षेत्र में पानी के इंतजाम करने पीएचई ने 16 करोड़ रुपए से अधिक के काम दिखाए हैं।
2010 के दौरान 14 लाख रुपए से अधिक के सामान की फर्जी खरीद शिवपुरी व अन्य जगह से दिखाईं।
2015 से 2017 तक राइजर पाइप बढ़ाने और नए नलकूप खनन में अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं।
क्षेत्रीय विधायक, जिपं सदस्य, जनपद सदस्यों सहित पीएचई अधिकारियों पर धोखा के आरोप लगा चुके हैं।
सरकारी राशि में अनियमितताएं और नलकूप आदि में गड़बडि़यों के मामलों की जांच दफन हो गई है।
सहकारी बैंक
लगभग 283 करोड़ रुपए के घाटे में आए बैंक को प्रबंधन और कर्मचारियों ने चूना लगाया है।
बैंक में 19 करोड़ रुपए का गबन सामने आ चुका है। बीते २५ वर्षों के दौरान २९ कर्मचारियों के गबन में होने के सबूत मिल चुके थे।
बैंक की चीनोर शाखा से संबद्ध ९ सोसायटियों पर सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के सबूत मिले।
समिति प्रबंधक कालीचरण गौतम सहित अन्य पर कार्रवाई के साथ वसूली के निर्देश भी दिए गए।
बैंक प्रशासक और कलेक्टर एक भी दोषी पर शिकंजा नहीं कस पाए।
वॉटर शेड
2001 से 2009 तक जल संरक्षण के लिए लगभग ७ करोड़ रुपए के काम कराए गए।
2009 से लेकर 2015 के बीच लगभग 18 करोड़ रुपए के काम यहां कराए गए।
संस्थाओं ने अधिकारियों के साथ मिलकर कागजों में जल संरचनाएं बना दीं।
शिकायत होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू की थी।
जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी, सरकारी धन को हड़पने की दास्तान दस्तावेजों में दफन होकर रह गई है।
Published on:
06 May 2018 11:05 am
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