
नाले में तब्दील हो रही स्वर्ण रेखा नदी अब उद्धार के लिए कौन बनेगा भगीरथ
ग्वालियर. राजशाही के जमाने में मेरी खूब पूछ परख हुआ करती थी। मेरा उद्गम हनुमान बांध से हुआ है, लेकिन अब मेरा वजूद समाप्त होकर महज एक नाला रह गया है। यह पीड़ा है शहर के बीचों-बीच बहने वाली स्वर्ण रेखा नदी की है। लगभग 29 किमी लंबी स्वर्ण रेखा नदी कभी शहर की जीवन रेखा हुआ करती थी और इस नदी से इतिहास भी जुडा हुआ है।
यह वह नदी है जिसके किनारे वीरांगना लक्ष्मीबाई ने अंतिम सांस ली थी और वर्तमान में वीरांगना का समाधि स्थल बना हुआ है। यह नदी कभी शहर की शान हुआ करती थी लेकिन अब स्वर्ण रेखा नदी का नाम सरकारी कागजों में ही है और निगम व प्रशासन की लापरवाही से यह एक नाला बन चुकी है। ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि इस नदी के उद्धार के लिए भगीरथ कौन बनेगा।
हैंडपंप सूखे व बोरिंग भी होने लगी फेल
स्वर्ण रेखा नदी जब से कंक्रीट की बनी है तब से नगर में भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। जिसका परिणाम यह हुआ कि आसपास के क्षेत्र में लगे हैंडपंप तक सूख चुके हैं और बोरिंगे भी फेल होती जा रही हैं। वहीं शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए तिघरा पर लगातार लोड बढ़ता जा रहा है।
नाव का सपना दिखाकर करोड़ों कर दिए खर्च
विकास के नाम पर निगम अधिकारियों ने स्वर्ण रेखा में साफ पानी बहाने के नाम पर शहरवासियों को नदी में नाव चलाने का सपना दिखाते हुए इसमें करोड़ों रुपए खर्च कर इसे कंक्रीट कर दिया, लेकिन इसमें नाव तो नहीं चली उल्टा शहर का भूजल स्तर तेजी से गिरने के साथ ही नदी नाला में बदल गई।
इस तरह नाले में परिवर्तित हुई नदी
-2009 से पहले स्वर्ण रेखा को सिंचाई विभाग के माध्यम से पक्का किया गया।
-आसपास की दीवारों के साथ तल भी पक्का किए जाने से उसमें पानी जमीन में बैठना बंद हो गया।
-बारिश का पानी भी व्यर्थ बहकर शहर से बाहर चले जाने की वजह से जल स्तर गिरता गया।
-लश्कर और ग्वालियर उपनगर के अधिकतर गंदे नालों का निकास इसी नदी से है।
-निगम के पीएचई ने सीवर को बाहर ले जाने के लिए स्वर्णरेखा के नीचे सीवर लाइन डाल दी।
-सीवर लाइन की गंदगी लगातार नदी में घुलती जा रही है।
-कई सालों से व वर्तमान में नदी में बने सीवर के चैंबरों से गंदगी निकलती हुई नदी में साफ दिखाई दे रही है।
स्वर्ण रेखा को अपने वापस स्वरूप में लाने के लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं। हम नदी में साफ पानी बहे उसके लिए लगातार प्लान बना रहे हैं।
हर्ष सिंह, आयुक्त नगर निगम
Published on:
05 Jun 2023 06:03 pm
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