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शहर में आवारा कुत्तों का आतंक : 5 साल की मासूम पर किया हमला, सिर्फ 3 महीने में 10 हजार लोगों को काटा

शहर में हर आम और खास इलाके में आवारा कुत्ते लोगों का अपना निशाना बना रहे हैं। आलम ये है कि, यहां आम लोग खासकर बच्चे और बुजुर्ग डर के साए में सड़क पर निकलने को मजबूर हैं।

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शहर में आवारा कुत्तों का आतंक : 5 साल की मासूम पर किया हमला, सिर्फ 3 महीने में 10 हजार लोगों को काटा

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां के हर आम और खास इलाके में आवारा कुत्ते लोगों का अपना निशाना बना रहे हैं। आलम ये है कि, यहां आम लोग खासकर बच्चे और बुजुर्ग डर के साए में सड़क पर निकलने को मजबूर है। इन हालातों को देखकर लगता है कि, शहर में लगातार बढ़ रही स्ट्रीट डॉग्स की आबादी की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन के पास भी कोई व्यवस्था नहीं है।


आपको बता दें कि, ग्वालियर के ललितपुर कॉलोनी इलाके में रहने वाले राम बाबू प्रजापति की बेटी को रविवार शाम आवारा कुत्तों ने दबोच लिया। जब उसे बचाने के लिए दूसरी बेटी कुत्ते से भिड़ी तो उस पर भी कुत्तों ने हमला कर दिया। यही नहीं, महाराज बड़ा इलाके में रहने वाली बच्ची मीनू खेलने के लिए घर से निकली थी, इस दौरान सड़क पर जा रहे आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। आवारा कुत्ते ने सलोनी के पैरों को जख्मी कर दिया। कुछ समय पहले ही मीनू की छोटी बहन को भी आवारा कुत्ते काट लिया था।

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सिर्फ तीन महीने और 10 हजार के करीब लोगों को बना चुके शिकार

ग्वालियर शहर में एक जनवरी से 10 अप्रैल तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 3 बड़े सरकारी अस्पतालों में 9867 लोग कुत्तों का शिकार होकर रेबीज़ का एंटीडोज लगवाने पहुंचे हैं। कुत्तों का शिकार हुए यह आंकड़ा उन लोगों का है जो ग्वालियर के 3 बड़े अस्पतालों में पहुंचे हैं। इसके अलावा भी हज़ारों की तादाद में ऐसे लोग हैं, जो कुत्तों का शिकार होने के बाद निजी अस्पतालों में या फिर देहात के सरकारी अस्पतालों में पहुंचे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि गर्मी में आवारा कुत्ते हिंसक होकर हमला कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त इंजेक्शन और दवाएं उपलब्ध है।

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निगम-प्रशासन के पास नहीं कोई ठोस कदम

शहर में आवारा कुत्तों की आबादी भी 50 हजार के पार पहुंच चुकी है। कुत्तों के बढ़ते आतंक से महिला, बच्चें और बुजुर्गों की जान आफत में है,लेकिन निगम और जिला प्रशासन आवारा कुत्तों की धरपकड़ को लेकर कोई ठोस कदम नही उठा पा रहा है। जिसके चलते डॉग बाइट की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है।