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प्रदेश में सबसे महंगी नसबंदी फिर भी सड़कों पर कुत्तों का झुंड, केज खाली

ग्वालियर. शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम की तरफ से एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर बनाए हैं। प्रदेश में कुत्तों की सबसे महंगी नसबंदी ग्वालियर नगर निगम कर रहा है जो लगभग प्रति कुत्ता 170 रुपए है। इसके बावजूद शहर में कुत्तों की आबादी कम होने की जगह बढ़ती जा रही […]

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ग्वालियर. एबीसी सेंटर के केज

ग्वालियर. शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम की तरफ से एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर बनाए हैं। प्रदेश में कुत्तों की सबसे महंगी नसबंदी ग्वालियर नगर निगम कर रहा है जो लगभग प्रति कुत्ता 170 रुपए है। इसके बावजूद शहर में कुत्तों की आबादी कम होने की जगह बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि शहर की प्रमुख सडकें, गली-मोहल्ले में घूम रहे खूंखार कुत्तों का शिकार हर दिन कोई न कोई बनकर रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए जेएएच, हजीरा व मुरार अस्पताल पहुंच रहा है। मंगलवार को भी करीब 300 लोग इंजेक्शन लगवाने अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे हैं। जबकि नगर निगम द्वारा कुत्ते पकड़ने के लिए एक करोड़ में ठेका एनिमल केयर फाउंडेशन संस्था को दिया है जो प्रतिदिन 15 व 20 कुत्ते पकड़कर एबीसी सेंटर बिरला नगर व लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम के पास ले जाने का दावा करता है। रोजाना की नसबंदी का आंकड़ा बढ़ा हुआ है। मौके पर हकीकत ये है कि बिरला नगर पुल के नीचे और लक्ष्मीगंज में बनाए गए एबीसी सेंटर पर केज खाली पड़े हुए हैं। खाली केज और नसबंदी का बढ़ा आंकड़ा एबीसी सेंटर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

ये हैं जिम्मेदार चेहरे

-केशव सिंह चौहान (उपयंत्री) नोडल अधिकारी, एबीसी सेंटर हैं। इन पर अतिरिक्त चार्ज मदाखलत नोडल अधिकारी, मदाखलत अधिकारी ग्वालियर विधानसभा।
-गौरव परिहार (विनियमित कर्मचारी)- सहायक नोडल अधिकारी एबीसी सेंटर हैं। इन पर अतिरिक्त चार्ज वंडर पार्क नोडल अधिकारी, ट्रैफिक प्रभारी, जू केयर टेकर है।

एबीसी सेंटरों की हकीकत

लक्ष्मीगंज: यहां पर प्रतिदिन कुत्तों को पकड़कर लाते हैं। यहां दस केज बनाए हैं, लेकिन मुश्किल से तीन-चार केजों में ही 10-15 कुत्ते हैं। जबकि हर दिन 20 के नसबंदी बताया जा रहा है। यहां सफाई भी नहीं है, जगह-जगह गंदगी दुर्गंध भी आ रही है। निरीक्षण में लापरवाही मिलने पर आयुक्त ने नोडल केशव चौहान को नोटिस भी दिया था।
बिरला नगर: पुल के नीचे बने सेंटर का भी यही हाल है। यहां प्रतिदिन 10 से 20 कुत्ते पकड़कर लाने की बात कर्मचारी कह रहे हैं। जबकि नसबंदी 20 से 25 होना बताया जा रहा है। यहां भी केज व बाहर भी गंदगी काफी है। यदि कोई आता है तो कर्मचारी तत्काल पानी डालकर सफाई कर देते हैं पर केज में गंदगी रहती है।

एक दिन में लगे रेबीज इंजेक्शन

जेएएच-120
हजीरा-114
मुरार-135
कुल-369

इनका कहना है

अभी नगर निगम व संस्था की एक-एक गाड़ी सहित कुल दो गाड़ियों की मदद से प्रतिदिन 15 से 20 कुत्तों को पकड़कर एबीसी सेंटर पर पहुंचाया जा रहा है। जहां नसबंदी की जा रही है। पिपरौली में भी डॉग सेंटर बनाया जाएगा, इस पर कार्रवाई जारी है।

- प्रदीप तोमर, अपर आयुक्त नगर निगम