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अधिवक्ता की गलति के लिए पक्षकार को कष्ट नहीं उठाना चाहिए: कोर्ट

कोर्ट ने अधिवक्ता को मर्सी होम में रह रहे बच्चों के साथ समय बिताने भेजा, खाने के लिए भी साथ ले जाना पड़ेगा

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अधिवक्ता की गलति के लिए पक्षकार को कष्ट नहीं उठाना चाहिए: कोर्ट

अधिवक्ता की गलति के लिए पक्षकार को कष्ट नहीं उठाना चाहिए: कोर्ट

ग्वालियर. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक अधिवक्ता को मर्सी में यह कहते हुए सेवा के लिए भेजा है कि अधिवक्ता की गलती का कष्ट पक्षकार को नहीं उठाना चाहिए। इसलिए अधिवक्ता को मर्सी होम में रह रहे बच्चों के साथ एक घंटे समय बिताना होगा। उनके खाने के लिए भी सामग्री साथ ले जानी होगी। एनजीओ जिस तरह से बच्चों की देखभाल करती हैं, उस हिसाब से सेवा करनी होगी। 15 दिन के भीतर मर्सी होम जाना होगा। कोर्ट ने इस शर्त को पूरा करने पर याचिका पुन: सुनवाई में ले लिया। यह आदेश जस्टिस आनंद पाठक ने दिया है।
दरअसल सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ नरेंद्र उपाध्याय(सेवा निवृत्त) के खिलाफ उनके ही अधीनस्थ कर्मचारी ने अभद्र व्यवहार, गाली गलौच सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। नरेंद्र उपाध्याय के खिलाफ गुना के जिला सत्र न्यायालय में विचारण चल रहा था। इस विचारण को उपाध्याय ने हार्ईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट से उपाध्याय को राहत मिल गई। 22 फरवरी 2023 को याचिका सुनवाई में आई। याचिका में वकील की उपस्थिति के लिए आवाज बी लगार्ई, लेकिन याचिकाकर्ता के अधिवक्ता न्यायालय में नहीं पहुंचे। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को कोर्ट के आदेश की जानकारी मिली तो फिर से सुनवाई का आवेदन पेश किया। उसमें तर्क दिया कि दूसरे न्यायालय में बहस के चलते पैरवी के लिए उपस्थित नहीं हो सके। इस कारण याचिका खारिज हुई है। कोर्ट ने कहा कि यह अधिवक्ता की गलती है, जिसका नुकसान पक्षकार नहीं उठाएगा। अधिवक्ता स्मृति शर्मा को एक घंटे के लिए मर्सी होम भेजा है।