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होली खेलने में सूतक का कोई असर नहीं, सिर्फ भगवान के गर्भगृह में जाकर नहीं खेल सकते

ग्वालियर. रंगों का महापर्व होली इस बार खगोलीय और ज्योतिषीय ²ष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा और चंद्रग्रहण का अनूठा संयोग बन रहा है, जिसे लेकर जनमानस में असमंजस की स्थिति है। ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन एवं विभिन्न प्रतिष्ठित पंचांगों ने शास्त्र सम्मत मत स्पष्ट करते हुए कहा है कि होलिका […]

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होलिका दहन

ग्वालियर. रंगों का महापर्व होली इस बार खगोलीय और ज्योतिषीय ²ष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा और चंद्रग्रहण का अनूठा संयोग बन रहा है, जिसे लेकर जनमानस में असमंजस की स्थिति है। ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन एवं विभिन्न प्रतिष्ठित पंचांगों ने शास्त्र सम्मत मत स्पष्ट करते हुए कहा है कि होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को ही किया जाएगा। वहीं धुलेंडी को लेकर भी असमंजस की स्थिति है, 3 मार्च को पड़ने जा रहे चंद्रग्रहण के सूतक के चलते कुछ लोग 4 मार्च को होली खेलने का मन बना रहे हैं, जबकि जानकारों का मानना है कि होली खेलने में सूतक का कोई असर नहीं होता। सिर्फ भगवान के गर्भगृह में जाकर होली नहीं खेल सकते।

भद्रा और पूर्णिमा का गणित

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 2 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा शाम 5.55 बजे प्रारंभ होगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का भी आगमन हो जाएगा, जो अगले दिन 3 मार्च को तड़के 5.28 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, ङ्क्षकतु इस बार 3 मार्च को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी (शाम के समय) नहीं है, इसलिए 2 मार्च को ही दहन शास्त्रोक्त है।

सराफा में जलेगी 25 हजार कंडों की होली

होली उत्सव समिति सराफा बाजार की ओर से सराफा बाजार में 25 हजार कंडों से सजी 20 फीट उंची होलिका का दहन सोमवार को रात 10 बजे किया जाएगा। समिति के पदाधिकारी गोपाल दास अग्रवाल ने बताया कि होलिका दहन के लिए सड़क को नुक्सान न पहुंचे इसके लिए 5 ट्रॉली मिट्टी बिछाकर बेस तैयार किया गया है। सराफा बाजार में करीब 70 साल से होली जलती आ रही है। शहर में सबसे बड़ी कंडों की होली यहीं पर जलती है, रविवार तक इसे सजाकर तैयार कर लिया जाएगा। होलिका दहन के लिए मुरैना के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 25 हजार कंडे मंगाए गए हैं। होलिका दहन के लिए सराफा बाजार में आकर्षक विद्युत सज्जा व अन्य सजावट की जाएगी।

15 दिन में दूसरा ग्रहण

खास बात यह है कि 15 दिन में दो ग्रहण का योग बना है। हाल ही 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण रहा था। हालांकि, यह ग्वालियर सहित देश में नहीं दिखा। अब 3 मार्च को चंद्र ग्रहण प्रभावी होगा। यह भारत में दिखेगा, इसलिए सूतक माना जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार ये दोनों ही ग्रहण नकारात्मकता के प्रतीक भी हैं। ऐसे में आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में उथल पुथल रहेगी।

विद्वानों एवं पंचांगों का एकमत

प्रतिष्ठित पंचांगों ने भी 2 मार्च को ही मुहर लगाई है
-निर्णय सागर पंचांग (नीमच) सूर्यास्त के बाद 2 घंटे 24 मिनट की अवधि में दहन शास्त्रोक्त है।
-राजधानी एवं शिव शक्ति पंचांग : भद्रा मुख को छोड़कर 2 मार्च को ही पर्व मनाना उचित है।
-जैनी जियालाल जैन पंचांग : 2 मार्च को होलिका दहन की पुष्टि करता है।

होलिका दहन के शुभ मुहूर्त

2 मार्च को भद्रा के मुख काल को त्यागकर प्रदोष काल में पूजन व दहन श्रेष्ठ रहेगा
-सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : शाम 6.18 बजे से रात्रि 8.49 बजे तक।
-सामान्य मुहूर्त : रात्रि 2.37 बजे से पूर्व तक।
-वर्जित समय : रात्रि 2.37 बजे से 4.33 बजे के मध्य दहन कदापि न करें।

कहां किस समय जलेगी होली

*अचलेश्वर मंदिर में 2 मार्च को शाम 7.30 बजे होलिका दहन किया जाएगा।
*सनातन धर्म मंदिर में 2 मार्च को शाम 7 बजे होलिका दहन किया जाएगा।
*गुप्तेश्वर मंदिर पर 2 मार्च को शाम 6.30 बजे होलिका दहन होगा।