
ग्वालियर. मध्यप्रदेश में नेताओं और उनके सरकारी बंगलों को लेकर होने वाली चर्चाएं एक बार फिर तेज हैं और इस बार चर्चाओं के तेज होने की वजह इमरती देवी और उनका सरकारी बंगला है। शनिवार को लोकनिर्माण विभाग की तरफ से इमरती देवी को पूर्व मंत्री बताते हुए बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था। लेकिन चंद घंटों के अंदर ही पूर्व मंत्री से इमरती देवी कैबिनेट मंत्री हो गईं और बंगला खाली करने का आदेश तो निरस्त हुआ ही उस अधिकारी का ट्रांसफर भी हो गया जिसने आदेश जारी किया था।
पहले आदेश में पूर्व मंत्री, दूसरे आदेश में कैबिनेट मंत्री
शनिवार को लोक निर्माण विभाग के संभाग-1 के प्रभारी कार्यपालन यंत्री हरिओम शर्मा ने इमरती देवी को ग्वालियर में झांसी रोड स्थित 44-ए नंबर के सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस जारी किया था। जिसमें लिखा गया था कि आपको मंत्री कार्यकाल के दौरान ये बंगला दिया गया था लेकिन वर्तमान में आपके पास की पद नहीं है इसलिए बंगले को खाली कर लोक निर्माण विभाग को सौंपा जाए। हालांकि कुछ ही घंटों बाद लोकनिर्माण विभाग की ओर से बंगला खाली करने वाले नोटिस को निरस्त करते हुए नया नोटिस जारी किया गया जिसमें इमरती देवी को कैबिनेट मंत्री लिखा हुआ था।
इमरती देवी ने उठाए थे सवाल
लोक निर्माण विभाग की तरफ से जारी हुए इस नोटिस के बाद इमरती देवी ने सवाल उठाते हुए कहा था कि उनका मंत्री पद से इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ है ऐसे में बंगला खाली करने का नोटिस उन्हें कैसे दिया जा सकता है? इमरती देवी के इस तरह से सवाल उठाए जाने के बाद नोटिस को लेकर चर्चाएं बढ़ गई थीं और चंद घंटों के अंदर ही लोकनिर्माण विभाग की ओर से ये कहते हुए नोटिस को निरस्त करने का नया नोटिस जारी हुआ कि विभाग को जानकारी का अभाव था इतना ही नहीं नए नोटिस में इमरती देवी को कैबिनेट मंत्री भी लिखा गया ।
नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का भोपाल ट्रांसफर
लोकनिर्माण विभाग की तरफ से इमरती देवी को बंगला खाली करने नोटिस तो निरस्त किया गया ही साथ ही उस अधिकारी का भी चंद घंटों के अंदर ट्रांसफर कर दिया गया जिनने इमरती देवी को नोटिस जारी किया था। अधिकारी हरिओम शर्मा का ट्रांसफर ग्वालियर से भोपाल कर दिया गया है।
Published on:
06 Dec 2020 04:48 pm
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