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समग्र आइडी के लिए भटक रहीं महिलाएं, लाड़ली बहना योजना की वजह से बदली व्यवस्था

कलेक्ट्रेट में 300 आवेदन लंबित

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समग्र आइडी के लिए भटक रहीं महिलाएं, लाड़ली बहना योजना की वजह से बदली व्यवस्था

समग्र आइडी के लिए भटक रहीं महिलाएं, लाड़ली बहना योजना की वजह से बदली व्यवस्था

ग्वालियर. शासन ने 23 से 60 वर्ष की महिलाओं की समग्र आइडी बनाने की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब यह नगर निगम की बजाय कलेक्ट्रेट से बनेगी। लेकिन कलेक्टर की आइडी नहीं बनने से महिलाओं की समग्र आइडी नहीं बन रही है। अब तक 300 से अधिक आवेदन लंबित हो गए हैं। महिलाएं अपनी आइडी के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रही हैं।
दरअसल, लाड़ली बहना योजना का लाभ लेने के लिए समग्र आइडी होना जरूरी है। यदि समग्र आइडी नहीं है तो योजना का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी महिलाएं जो विवाह होकर अपने ससुराल आ गई हैं और उनका नाम परिवार की समग्र आइडी में नहीं है, उन्हें उसमें नाम जुड़वाना होगा। अभी तक महिलाओं के नाम स्थानीय निकायों से जुड़ जाते थे, नगर निगम से इसमें सुधार हो जाता था। लेकिन पिछले महीने व्यवस्था में बदलाव किया गया है। आवेदन आने के बाद कलेक्ट्रेट से आइडी जनरेट हो गई। लेकिन कलेक्टर की आइडी जनरेट नहीं होने से आवेदन एप्रूव नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण पेंडेंसी बढ़ गई है। दूसरे फेज में लाड़ली बहना योजना के रजिस्ट्रेशन होने हैं, इसके चलते महिलाओं को आइडी की जरूरत है। इस समस्या को खत्म करने के लिए कलेक्टर की बायोमेट्रिक जानकारी भोपाल भेज दी है। सत्यापित होने के बाद कलेक्टर की आइडी तैयार हो जाएगी।
एक हजार रुपए महीने की बढ़ी चाहत
-लाड़ली बहना योजना के तहत जिले की तीन लाख पांच हजार महिलाओं को एक हजार रुपए प्रति महीना मिल रहे हैं। अब जो नई गाइड लाइन आ रही है, उसमें उम्र 23 से घटाकर 21 कर दी गई है।
-जिन परिवारों के पास ट्रैक्टर हैं, उन परिवारों की महिलाओं को भी लाड़ली बहना योजना का लाभ देने की तैयारी है। नई गाइड लाइन में ट्रैक्टर वाली शर्त हट जाएगी।
-ये दो बदलाव होने की वजह से महिलाओं में इस योजना के प्रति चाहत बढ़ी है। इस वजह से समग्र आइडी की जरूरत है।
-हालांकि बच्चों और पुरुषों की समग्र आइडी नगर निगम व स्थानीय निकाय से ही बनेगी।

समग्र आईडी बनाने के लिए हमारी भी आईडी चाहिए। इसका प्रस्ताव जा चुका है। आईडी बन जाने के बाद आवेदनों को एप्रूव करना शुरू कर देंगे।
अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर