
ग्वालियर. जिले में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ और पूर्व आईएएस विनोद शर्मा की अगुवाई में नीम के पौधों को लगाने का अभियान शुरू किया गया था। पौधोरोपण के लिए चिन्हित की गईं बंजर पहाडिय़ों पर करीब 50 हजार पौधे रोपे गए थे, जो अब नीम के वृक्षों में बदल चुके हैं। इसमें से शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर रायपुर पहाड़ी तो अब कम लागत में पौधे लगाना सीखने के लिए आदर्श बन चुकी है। इस पहाड़ी को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुका है।
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जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर और निगमायुक्त सहित अन्य पदों पर रहे पूर्व आईएएस विनोद शर्मा ने बॉटनी से की गई अपनी पढ़ाई के अनुभव को हरियाली बढ़ाने में लगाया और जहां भी पदस्थ रहे वहां हरियाली को बढ़ावा दिया। ग्वालियर में भी अलग-अलग पदों पर करीब छह वर्ष तक रही पदस्थी के दौरान उन्होंने लगभग 50 हजार पौधे लगवाए, जिनकी उत्तरजीविता 80 प्रतिशत रही है। पूर्व आईएएस की अगुवाई में तैयार किए गए नीम पर्वत आईएएस प्रशिक्षण के स्टडी टूर में भी शामिल किया जा चुका है।
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इन पहाडिय़ों पर घनी हरियाली
-रायपुर पहाड़ी पर 15 हजार से अधिक नीम, आंवला सहित अन्य पौधे लगाए गए थे, ये पहाड़ी हरियाली के लिए आदर्श बन गई है। इस पहाड़ी को आईएएस के स्टडी टूर में शामिल किया जा चुका है।
-नयागांव पहाड़ी पर अतिक्रमण में जा रही जमीन को बचाने के लिए नीम के पौधे लगाए गए थे। यहां करीब 6 हजार पौधे अब पेड़ बन गए हैं।
-मोहनगढ़ में पठारी और ढलवां मुरम की पहाड़ी पर पौधारोपण किया गया था, यहां करीब 4500 नीम सहित अन्य पौधे अब पेड़ बन गए हैं।
-शहर की सीमा में मौजूद उदयपुर पहाड़ी पर करीब 5 हजार पौधे लगाए गए थे, अधिकतर अब पेड़ बन चुके हैं।
-इसके अलावा कैथोदा, अमरौल,बनवार, सरसपुरा, जंगीपुर सहित अन्य गांवों में मुरम की पहाड़ी और सरकारी जमीन पर नीम, शीशम आदि पौधे लगाए गए थे, ये अब पेड़ बन गए हैं।
यह दे सकता है एक पेड़
-पीपल,नीम, बरगद, आम, जामुन,पाखर,ऊमर,गुलमोहर,महुआ आदि का एक पेड़ 100 से 150 पक्षियों को आसरा दे सकता है।
-एक पेड़ के आसपास लगभग 300 मीटर की परिधि में ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहती है।
- हरियाली रहने से हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना न के बराबर रहती है।
-धूल और प्रदूषण को सोखने की कुदरती क्षमता सिर्फ पेड़ों में है।
-बड़े पेड़ों के आसपास तापमान नियंत्रित रहता है।
पूर्व आईएएस विनोद शर्मा ने बताया कि हरियाली महोत्सव के समय हमने सघन वृक्षारोपण करने की योजना बनाई थी। इसके आधार पर बंजर जमीनों को चिन्हित किया गया ताकि इनको अतिक्रमण से भी बचाया जा सके और हरियाली भी बेहतर हो सके। इसमें हमारी पूरी टीम ने मन लगाकर काम किया और इसका परिणाम भी बेहतर मिला है। रायपुर पहाड़ी तो कम लागत में पौधों की उत्तरजीविता बनाए रखने के मामले में अब आदर्श बन चुकी है।
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Published on:
05 Jun 2021 09:59 am
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