
World Water Day 2024 : ग्वालियर में जलसंकट का अलर्ट, सबसे तेज घट रहा जमीन का जल स्तर, जाने वजह
दुनियाभर में आज 22 मार्च को 'विश्व जल दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। जल का महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता को लेकर आज मध्य प्रदेश समेत देशभर में जगह जगह आयोजन किए जा रहे हैं। हालांकि, देशभर में बड़े पैमाने पर सरकार और सामाजिक संस्थाओं द्वारा जल स्तर बढ़ाने के महत्वपूर्ण कार्य किए जाने के बावजूद भारत के कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां लोगों को भारी जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं में से एक इलाके पर मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर बसा हुआ है।
आपको बता दें कि ग्वालियर शहर जल संकट के मुहाने पर खड़ा हुआ है। यहां कई इलाके तो ऐसे हैं, जहां पिछले 10 सालों की तुलना में जमीन का जल स्तर 10 से 20 मीटर तक नीचे जा चुका है। यानी ये शहर ग्राउंड वाटर लेविल के मामले में सेमी क्रिटिकल जोन में आ चुका है। लेकिन इसके बाद भी अफसरों का रवैया गैर जिम्मेदाराना है। क्योंकि जिम्मेदारों की तरफ से जल स्तर बढ़ाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।
बीते साल के संभागीय भू-जल सर्वेक्षण ईकाई ग्वालियर के आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी क्षेत्र में कई इलाकों में 0.10 से लेकर 2.50 मीटर तक भू-जल स्तर में कमी आई है। भू-जल गिरने के पीछे मुख्य कारण बीते दो साल से कम बारिश होना और स्थानीय जलाशयों, वाटर बॉडीज पर जिम्मेदार अफसरों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाना है। शहरी क्षेत्र के सर्वे में 38 इलाकों में सिर्फ 10 इलाके ऐसे हैं, जहां भू-जल स्तर में बढ़ोतरी हुई। ये आंकड़ा 1 जनवरी 2023 से 1 जनवरी 2024 तक के सर्वे के मुताबिक है। शहर में कई वर्षों से वाटर बॉडी रिचार्ज के प्रयास नहीं हुए हैं और ना ही रैन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर कोई योजना बनी है। इससे गर्मी के दिनों में शहर में कई इलाकों में पानी की परेशानी हो सकती है।
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, ग्वालियर में भू-जल स्तर सेमी क्रिटिकल स्थिति में पहुंच गया है। लगातार भू-जल स्तर गिरने की वजह बढ़ती आबादी, अनियंत्रित भू-जल दोहन, अनियंत्रित शहर विस्तार और जल संचय की कमी है। करीब 10 साल पहले शहर में वाटर बॉडी की सफाई और रिचार्ज के लिए काम किया गया था ताकि फिर से भूमि से जल मिल सके। लेकिन उसके बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। वहीं पीएचई विभाग के अनुसार, अब शहर के अधिकतर इलाकों में चलने वाले ट्यूबवेल में पाइप बढ़ाने की नौबत आ गई है। कई इलाकों में भू-जल स्तर 10 फीट तक नीचे गिरा है।
भू-जल की स्थिति जानने के बाद भी अफसरों की ओर से जरूरी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हाल ही में जल संकट को देखते हुए शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई शुरू की गई है। अफसरों ने जल संकट से निपटने के लिए टैंकर संचालन की योजना भी बना ली। लेकिन जल का पुनर्भरण और संचय कैसे हो, इस पर ध्यान नहीं है। बीते पांच-छह सालों से रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर कार्य ही नहीं किया गया है। स्थिति ये है कि शासकीय भवनों में भी वाटर हार्वेस्टिंग बंद पड़ी है। साथ ही कलेक्टर द्वारा बोरिंग पर लगाए जाने के बाद भी शहर में धड़ल्ले से बोरिंग हो रहे हैं। खास बात ये है निगम ने वाटर हार्वेस्टिंग की योजना नहीं बनाई है, जबकि कई कंपनियां यहां से काम करने को तैयार हैं।
क्षेत्र ----- जनवरी 2023 ------ जनवरी 2024 ---- अंतर
2023 2024
महाराजपुरा 14.20 14.40 -0.20
सौंसा 17.90 20.10 -2.20
सिकरौदा 16.05 17.00 -0.95
लखनौती 6.40 7.45 -1.05
सुमेर का पुरा 9.00 9.90 -0.90
केशवपुर 1.85 3.45 -1.60
रतवाई 4.05 4.10 -0.05
सिरौल 2.30 2.10 -0.10
समौधन 4.35 6.75 -2.40
पिछोर 2.10 4.60 -2.50
सूखापठा 4.50 6.95 -2.45
सागरताल 15.0 15.15 -0.15
हजीरा 1.45 1.15 -0.30
तिघरा 3.05 3.95 -0.90
बरई 2.80 6.90 -4.10
दुर्सेदी 2.80 8.60 -5.80
रमौआ 8.25 8.95 -0.70
छत्री मंडी 16.05 12.50 3.55
मदनपुरा 9.50 7.05 2.45
गिरगांव 8.00 6.75 1.25
-अति दोहित श्रेणी : नलखेड़ा, पानसेमल, देवास, धार, इंदौर, सांवेर, बदनावर।
-क्रिटिकल श्रेणी : इंदौर, तिरला, छिंदवाड़ा।
-सेमी क्रिटिकल : ग्वालियर, चंदेरी, राजपुर, बैतूल, बुरहानपुर, नौगांव, मौखेड़ा, पथरिया, खत्तेगांव, महू, भोपाल।
सेफ : 70 प्रतिशत से कम भूमि जल का दोहन।
सेमी क्रिटिकल : 70 से 90 प्रतिशत के बीच भू जल का दोहन।
क्रिटिकल : 90 प्रतिशत से कम भूमि जल का दोहन
अति दोहित :100 प्रतिशत से अधिक भूमि जल का दोहन।
पीएचई नगर निगम के कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता का कहना है कि शहर में भू-जल स्तर ठीक स्थिति में नहीं है। ये बात सही है कि शहर में तेजी से पानी का लेवल नीचे जा रहा है। हमें जल संचय पर काम करना होगा और शहर की वाटर बॉडी को रिचार्ज, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग करने और पानी की बर्बादी को रोकना होगा। इसके लिए अभियान चलाएंगे।
साइंस कॉलेज में भू-जल विभाग के विशेषज्ञ एचओडी प्रो.सुयश कुमार ने बताया कि पानी के मैनेजमेंट पर विशेष रूप से कार्य करना होगा। आज तिघरा, रमौआ सहित अन्य बांध खाली पड़े हैं। शहर की सभी वाटर बॉडी को आमजन अपने घर की संपत्ति मानकर कार्य करें, तभी जल संकट से बचा जा सकता है। अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और निगम भी वाटर हार्वेस्टिंग व वाटर बॉडी रिचार्ज पर कार्य करे। गर्मी को देखते हुए पानी कम खर्च करें।
Published on:
22 Mar 2024 01:21 pm

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