बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर 'जादुई फूल' की खेती से किसान हो रहे मालामाल

- किसानों की किस्मत चमकी
- 12 हजार की लागत से एक लाख की होती है कमाई
- असाध्य बीमारियों के लिए बनती है आयुर्वेद-होम्योपैथी में दवा

By: Mahendra Pratap

Published: 15 Jun 2021, 03:37 PM IST

हमीरपुर. Bundelkhand barren land magic flower chamomile बुन्देलखंड की बंजर जमीन पर 'जादुई फूल' की खेती से किसानों की किस्मत बदल रही है। किसान मालामाल हो रहे हैं। कम लागत और अधिक मुनाफे की वजह से किसानों का रुझान लगातार 'जादुई फूल' की खेती की तरफ बढ़ रहा है। 'जादुई फूल' यानि कैमोमाइल वनस्पति से असाध्य बीमारियों के लिए आयुर्वेद और होम्योपैथी में दवाएं बनाई जाती हैं। जिस वजह से निजी कम्पनियाों में इसकी काफी मांग है और वे इसकी अच्छी कीमत दे रही हैं।

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किसानों की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत :- कैमोमाइल की खेती बुन्देलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए वरदान बन गई है। हमीरपुर, ललितपुर, महोबा और चित्रकूट सहित कई जिलों में कैमोमाइल की खेती की जा रही है। कम लागत के साथ इसकी खेती के लिए अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है।

खेती से जुड़ रहे और किसान :- हमीरपुर जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मजीत त्रिपाठी ने बताते हैं कि, झांसी के चार ब्लाकों के तमाम गांवों में किसान कैमोमाइल वनस्पति की खेती कर रहे है। हमीरपुर के अलावा महोबा, चित्रकूट में भी किसानों ने जादुई फूलों की खेती करना शुूरू कर दिया है। हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लॉक के चिल्ली गांव में 70 फीसदी किसान कैमोमाइल की खेती कर रहे हैं। खेतों में इस वक्त कैमोमाइल के फूल खिले हैं।

कैमोमाइल को जादुई फूल कहते हैं :- खेती पर काम करने वाली एक कम्पनी की सीईओ सैफाली गुप्ता बताती हैं कि, कैमोमाइल का आयुर्वेद में बहुत महत्व है। इस पौधे को यहां पर जादुई फूल नाम से पुकारा जाता है। कैमोमाइल की खेती बुन्देलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति धीरे—धीरे बदल रही है।

एक एकड़ जमीन में पौने पांच कुंतल उत्पादन :- एक निजी कम्पनी से जुड़े और किसान चन्द्रशेखर तिवारी ने कहना है कि, बंजर जमीन पर जादुई फूल की खेती किसान आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है। एक एकड़ जमीन में पौने पांच कुंतल जादुई फूल का उत्पादन होता है। इसकी खेती में दस से बारह हजार रुपए का खर्चा आता है। पर किसान को छह माह में ही लाखों रुपए की आमदनी हो जाती है। है।

कई कम्पनियों में भारी डिमांड :- किसान चन्द्रशेखर तिवारी ने बताया कि, राजस्थान, मध्यप्रदेश की कई कम्पनियों सहित बाबा रामदेव की कम्पनी जादुई फूल को खरीदती है। जादुई फूलों की डिमांड ज्यादा होने से अब इसकी खेती का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।

जादुई फूल (कैमोमाइल) से असाध्य बीमारी छूमंतर हो जाती है। आयुर्वेद और होम्योपेथिक में इसकी बहुत मांग है। इसके फूल और तेल से तमाम दवाएं बनाई जाती है। मधुमेह और पेट सम्बन्धी सभी बीमारी के लिए इस से बनी दवाएं रामबाण हैं।

सौन्दर्य प्रसाधन में भी प्रयोग :- होम्योपैथिक चिकित्सक डाँ. कुंवर पाल सिंह ने बताते हैं कि, जादुई फूल त्वचा के लिए बड़ा ही गुणकारी होता है। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, घबराहट, जलन में इसका सेवन करने से बड़ा फायदा मिलता है। चोट, मोच, खरोंच, घाव, रैसेज, पेट के विकारों के इलाज में ये फूल बहुत काम आता है। इस फूल के तेल से औषधियां बनती है। साथ ही सौन्दर्य प्रसाधन में इसका प्रयोग होता है।

कई बीमारियों में रामबाण :- हमीरपुर के वैद्य दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि जादुई फूल मधुमेह और पेट सम्बन्धी सभी बीमारी के लिए रामबाण है। इस फूल की नियमित चाय पीने से शुगर और अल्सर जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है।

Mahendra Pratap
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