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इस बार मंडी में गेहूं नहीं बेच रहे किसान, जानें इसके पीछे का कारण

गेहूं की सरकारी खरीद प्रतिवर्ष एक उत्सव की तरह रहता आया है, परंतु इस बार स्थिति ऐसी बन गई है कि जहां धान मंडी में पैदल चलने की राह नहीं मिलती थी वहां अब इक्का दुक्का ढेरियां देखने को मिल रही हैं।

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government procurement of wheat in Dhan mandi Sangaria

संगरिया. क्षेत्र में गेहूं की सरकारी खरीद प्रतिवर्ष एक उत्सव की तरह रहता आया है, परंतु इस बार स्थिति ऐसी बन गई है कि जहां धान मंडी में पैदल चलने की राह नहीं मिलती थी वहां अब इक्का दुक्का ढेरियां देखने को मिल रही हैं। खाली पड़े स्थान पर मुख्य बाजार की दुकानों की गाड़ियों की पार्किंग लगी हुई है। एक साथ हुए इस बदलाव से जहां बाजार क्षेत्र में निराशा का भाव देखने को मिल रहा है, वहीं इसके पीछे का मूल कारण गेहूं की कम बिजाई व भाव बढ़ने की संभावना को बताया जा रहा है। इस कारण किसान गेहूं बेचने के लिए शहर में लेकर नहीं आ रहा है। पूर्व में अप्रेल का अंतिम सप्ताह चारों ओर ट्रैक्टर ट्राली, श्रमिक व्यापारी किसान की भीड़ व गेहूं के बैग के चट्टों की कतार दिखाई देती थी परंतु इस बार की भाव की तेजी ने सब कुछ बदल कर रख दिया।

कम हुई है बिजाई
उपखण्ड अधिकारी रमेश देव व कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ.अनूप कुमार से प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि भूमि में इस बार गेहूं की बिजाई कम हुई है व सरसों के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि हुई है। यह एक बड़े बदलाव के रुप में है व एक तिहाई से अधिक किसान तिलहन की ओर बदले है।

सप्ताह की आवक का आंकड़ा
इस समय जहां प्रतिदिन तीस से चालीस हजार क्विंटल की आवक रहा करती थी, वहीं इतना पूरे सप्ताह में भी नहीं हो पाया है। स्थानीय कृषि उपज मंडी समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सप्ताह क्षेत्र में गेहूं की 50485 क्विंटल की आवक रही व न्यूनतम अधिकतम भाव 2015 से 2313 रुपए प्रति क्विंटल का रहा। सरसों की आवक 2800 क्विंटल रही व भाव 6435 से सात हजार रुपए प्रति क्विंटल का रहा। इसी प्रकार नरमा की आवक 4813 क्विंटल की रही व भाव 7300 से 11650 रुपए के रहे। जौ की 2320 क्विंटल आवक में भाव 2790 से 3100 रुपए प्रति क्विंटल का रहा। इसके अतिरिक्त चना, ग्वार व मूंग की आवक भी थोड़ी थोड़ी रही।

न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बिक रही सभी जिंस
क्षेत्र में सभी कृषि जिंस वर्तमान में न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य पर बिक रही है जिसके चलते सरकारी खरीद का आंकड़ा शून्य पर चल रहा है। इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपए, सरसों का 5050 रुपए, जौ 1635 रुपए प्रति क्विंटल है।

सरकारी खरीद का पिछले वर्षो का आंकड़ा
क्षेत्र में गेहूं की सरकारी खरीद का आंकड़ा वर्ष दर वर्ष बदलता रहा है परंतु इस बार के आवक के आंकड़े ने पिछले कई वर्षो के प्रभाव को बदल कर रख दिया है। मंडी में वर्ष 2021-22 में 1962142 बैग, वर्ष 2020-21 में 17लाख93हजार, 2019-20 में 12.76लाख, 2018-19 में 13.40लाख, 2017-18 में 10.88 लाख, २०१६-१७ में ११.६०लाख, 2015-16 में 15.27लाख, 2014-15 में 23.66लाख, 2013-14 में 17.97लाख, 2012-13 में 18.45लाख बैग गेहूं की खरीद की गई थी। एक बैग में 50 किलोग्राम की मात्रा रहती है।

बारदाने से लेकर माल उठाने तक की मनुहार
गेहूं की सरकारी खरीद के समय बाजार में व्यापारी व्यापार मंडल पदाधिकारियों व अधिकारियों से बारदाना उपलब्ध करवाने से लेकर माल उठाने तक की मनुहार के लिए दौड़ते नजर आते थे। वर्तमान में क्षेत्र में व्यापार मंडल समिति व फूडग्रेन व्यापार समिति दो संगठन सक्रिय है परंतु गेहूं की निजी खरीद होने से दोनों ही संगठन के पदाधिकारी भाग दौड़ से मुक्त चल रहे है।

भाव का करेंगे इंतजार
कृषक ओमप्रकाश पोटलिया व अरुण पूनियां ने बताया कि समय के साथ किसान नि:संदेह सम्पन्नता की ओर बढा है। बाजार में भाव बढने की संभावना के चलते माल को गोदाम में स्टॉक लगाया गया है जिससे उचित भाव आने पर उन्हे विक्रय किया जा सके। उन्होने बताया कि धन की आवश्यकता के अनुरुप थोड़ा थोड़ा माल ही विक्रय करने की नीति में सभी किसान जुटे हुए है।