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राजस्थान के इस जिले में किसानों का हिंसक प्रदर्शन, विधायक का सिर फूटा, 14 गाड़ियां फूंकीं; आज भी इंटरनेट बंद

Hanumangarh Ethanol Factory Violence: राजस्थान के हनुमानगढ़ ​जिले में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के कारण आज भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

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Hanumangarh Farmers Protest Violence

एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसानों का प्रदर्शन। फोटो: पत्रिका

हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ ​जिले में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के कारण आज भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। गुरुवार सुबह से प्रदर्शन स्थल के पास के गुरुद्वारे में किसानों की भीड़ लगी हुई है। ऐसे में तनाव बढ़ने की आशंका है। प्रशासन की ओर से जिले के टिब्बी क्षेत्र में आज भी इंटरनेट बंद है। वहीं, पुलिस प्रशासन हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का सख्त पहरा है।

इससे पहले बुधवार को इथेनॉल प्लांट के विरोध के चलते टिब्बी क्षेत्र में हालात बेकाबू हो गए। राठीखेड़ा गांव के पास चक पांच आरके में निर्माणाधीन इथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ पिछले 15 माह से चल रहा आंदोलन महापंचायत के बाद अचानक हिंसक हो उठा था। हजारों की भीड़ बैरिकेडिंग तोडक़र फैक्ट्री परिसर में घुस गई और दीवारें गिरा दीं। कई जगह तोडफ़ोड़ के बाद करीब 14 वाहनों में आग लगा दी।

भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया, जवाब में प्रदर्शनकारियों ने ईंट-पत्थर फेंके। झड़पों में करीब तीन दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो दर्जन पुलिसकर्मी और लगभग 12 आंदोलनकारी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों में तीन को गंभीर हालत में रेफर किया गया। इस दौरान भीड़ दबाव में आने के बजाय और उग्र हो गई।

विधायक अभिमन्यु पूनिया भी घायल

विधायक अभिमन्यु पूनिया भी सिर में चोट लगने से घायल हुए, जिन्हें हनुमानगढ़ के राजकीय जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर शाम तक बड़ी संख्या में आंदोलनकारी अंदर-बाहर डटे रहे और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।

महापंचायत के बाद भड़का था गुस्सा

एसडीएम कार्यालय के बाहर बुधवार सुबह हुई महापंचायत में किसान संगठनों, गांवों की महिलाओं, युवाओं और किसान यूनियनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। किसान नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए और किसानों से सहमति होने तक प्लांट आगे न बढ़ाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि दोपहर दो बजे तक जवाब न मिलने पर वे फैक्ट्री की ओर मार्च करेंगे। प्रशासन की ओर से कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर भीड़ अचानक आक्रोशित हो उठी और बैरिकेडिंग तोड़ते हुए फैक्ट्री परिसर में जा घुसी।

दीवार तोड़ी, आग लगाई, सामान फूंका

फैक्ट्री परिसर में प्रवेश के बाद भीड़ ने दीवारें ट्रैक्टर से गिरा दीं। कार्यालयनुमा ढांचे और मशीनरी के ढेर पर आग लगा दी। बाहर खड़े वाहनों में भी तोडफ़ोड़ की गई। सुरक्षा घेरे में मौजूद पुलिस पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर पथराव किया। पुलिस ने चेतावनी के बाद आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन हजारों की संख्या में मौजूद आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे।

पुलिस-आंदोलनकारी भिड़ंत में 36 घायल

कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिनभर घायलों को लाया जाता रहा। चिकित्सा प्रभारी के अनुसार 36 घायलों में 24 पुलिसकर्मी तथा 12 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। कई पुलिसकर्मी के सिर और कंधे में गंभीर चोटें आईं। विधायक अभिमन्यु पूनिया को हनुमानगढ़ रेफर किया गया।

कस्बा छावनी में तब्दील

घटना की आशंका को देखते हुए मंगलवार रात आठ बजे से ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। सुबह से ही कस्बे में भारी पुलिस बल तैनात रहा। बाजार पूरी तरह बंद रहा। पंजाब और हरियाणा से भी किसान संगठनों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे, जिससे भीड़ कई गुना बढ़ गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शाम तक अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। बुधवार देर रात तक हजारों किसान फैक्ट्री परिसर के अंदर-बाहर जमे थे। प्रशासन हालात काबू करने में जुटा रहा। क्षेत्र में आज भी सुबह से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।