
घग्घर नदी ( फाइल फोटो-पत्रिका)
हनुमानगढ़। घग्घर बहाव क्षेत्र में सुरक्षा व सौंदर्यीकरण के कार्य आने वाले समय में शुरू होंगे। राज्य सरकार की बजट घोषणा में इन कार्यों के लिए 325 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। जीडीसी और नाली बेड में होने वाले कार्य के लिए डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कंसल्टेंट एजेंसी (नेपकोन) की टीम लगातार इन कार्यों को करवाने को लेकर संभावनाएं तलाश रही है। नेपकोन की की ओर से गांवों में शिविर लगाकर ग्रामीणों के सुझाव लिए जा रहे हैं। गुरुवार को घग्घर क्षेत्र के कुछ गावों में शिविर लगाया गया। गंगागढ़ के पास लगे शिविर में लोगों की राय जानी गई।
जल संसाधन उत्तर हनुमानगढ़ के चीफ इंजीनियर प्रदीप रुस्तगी, एसई शिवचरण रेगर, एक्सईएन हरि सिंह सिहाग मौजूद रहे। प्रशासक नवनीत संधू के नेतृत्व में किसानों ने नाली बेड का सीमांकन करने का मुद्दा उठाया।
ग्रामीणों ने नाली बेड की चौड़ाई बढ़ाने, अवैध बंधे हटाने सहित कई सुझाव दिए। उन्होंने सीमांकन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बहाव क्षेत्र की सेंटर लाइन से दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ बीघा भूमि का सीमांकन किया जाए। मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने जल संसाधन खंड द्वितीय के एक्सईएन हरि सिंह को प्रशासन से वार्ता कर सीमांकन की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। इस दौरान कृषकों ने कहा कि घग्घर के पानी का सदुपयोग करते हुए पाइप लाइन के जरिए बारानी क्षेत्र तक पहुंचाया जाए।
राज्य सरकार ने घग्घर क्षेत्र की चौड़ाई छह से तीन बीघा कर दी गई है। इसमें कुछ शर्तें भी लगाई है। इसका अध्ययन संबंधित एजेंसी कर रही है। जीडीसी की लाइनिंग पक्की करने, पुलों के निर्माण के बाद इसका क्या असर आएगा, किस तरह से रिवर फ्रंट के तौर पर हनुमानगढ़ शहरी क्षेत्र में नदी क्षेत्र को विकसित किया जाए। इन तमाम पहलुओं पर कंसल्टेंट एजेंसी (नेपकोन) विचार कर रही है।
हनुमानगढ़ शहर से गुजर रही घग्घर नदी के विकास को लेकर घग्घर बाढ़ नियंत्रण व जल संसाधन विभाग की टीम ने गत दिनों डीपीआर बनाकर राज्य सरकार को भिजवाया था। बजट घोषणा में सरकार ने बजट मंजूर करके कार्य शुरू करवाने की स्वीकृति दी। इसमं दो चरणों में काम शुरू होंगे। पहले चरण में नदी की साइड लाइनिंग पक्की होगी। इसके बाद शहरी क्षेत्र में बह रह नदी क्षेत्र में नगर परिषद के सहयोग से लाइटिंग करवाकर तथा इसमें नाव आदि चलाने की योजना है। इस तरह से रिवर फ्रंट की तर्ज पर नदी क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी है।
घग्घर नदी क्षेत्र की बात करें तो हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के आसपास शिवालिक की पहाडिय़ों से घग्घर नदी में पानी का प्रवाह होता है। काफी मात्रा में हरियाणा के ओटू हैड पर पानी का भंडारण कर लिया जाता है। इसके बाद राजस्थान में पानी छोड़ा जाता है। इसके बाद अनूपगढ़ के रास्ते घग्घर का पानी पाकिस्तान जाता है। अनूपगढ़ के रास्ते ही पानी पाक सीमा स्थित भेड़ताल पर पहुंचता है। घग्घर का आगमन हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास शिवालिक पहाडिय़ों के पास से माना जाता है।
वर्ष---------पानी
2000--5000
2001--5000
2002--3800
2003--3900
2004--5000
2005--3000
2006--3000
2007--3000
2008--4500
2009--4000
2010--5000
2011--3000
2012--3000
2013--4000
2014 1800
2015 4000
2016--3000
2017--2400
2018--4700
2019--5000
2020--3000
2021--5000
2022 5000
2023 7000
2024--3950
2025--6000
(हनुमानगढ़ क्षेत्र में घग्घर के नाली बेड में वर्षवार चले अधिकतम पानी को क्यूसेक में समझें।
Updated on:
10 Apr 2026 03:37 pm
Published on:
10 Apr 2026 03:30 pm
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