
राज रकबा की नहीं 'राज' को भी खबर
राज रकबा की नहीं 'राज' को भी खबर
- सिंचित एवं असिंचित भूमि का भी नहीं रिकॉर्ड संधारित
- राजस्व मंडल राजस्थान का जवाब
हनुमानगढ़. राज रकबा की 'राज' को खबर नहीं है। सिंचित एवं असिंचित भूमि को लेकर भी बेखबरी का आलम है। प्रदेश में कितना राज रकबा है, कितनी सिंचित एवं असिंचित भूमि है, इसका रिकॉर्ड राजस्व मंडल अजमेर के पास नहीं है मतलब कि रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जाता है। सूचना का अधिकार आवेदन के तहत राजस्व मंडल अजमेर ने उपरोक्त भूमि संबंधी जानकारी को लेकर रिकॉर्ड संधारित नहीं होने का जवाब दिया है।
सूचना का अधिकार जागृति मंच के अध्यक्ष प्रवीण मेहन ने राजस्व मंडल अजमेर से पूछा था कि प्रदेश के जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर एवं चूरू जिलों में चक के अनुसार कितनी भूमि सिंचित, असिंचित एवं राज रकबा है तथा भूमि का कितना प्रकार वगैरह है। इसके जवाब में राजस्व मंडल ने जानकारी दी कि चाही गई सूचना राजस्व मंडल की ओर से संधारित नहीं की जाती है। इसके बाद आवेदनकर्ता ने राजस्थान राज्य सूचना आयोग में अपील की। वहां सुनवाई के बाद आयोग ने अपीलार्थी को राजस्व मंडल की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना को विधिमान्य, उचित एवं पर्याप्त बताते हुए अपील खारिज कर दी गई।
जहां संधारण, उसका बताओ नाम
आरटीआई जागृति मंच के जिलाध्यक्ष प्रवीण मेहन ने बताया कि राजस्व मंडल ने राज रकबा, सिंचित एवं असिंचित भूमि को लेकर रिकॉर्ड संधारित नहीं किए जाने का जवाब दिया। इस तरह का जवाब पिछले कुछ बरसों में दर्जनों आरटीआई आवेदन में मिला है। संभव है कि कई सरकारी विभागों में ऐसी स्थिति हो, रिकॉर्ड कोई दूसरा विभाग संधारित कर रहा हो। मगर रिकॉर्ड संधारित नहीं किया जाता के साथ जहां किया जाता है, उस विभाग एवं संस्था का नाम बताना चाहिए। यह भी तो एक तरह से आवेदनकर्ता के कानून के इस्तेमाल संबंधी अधिकार का संरक्षण ही होगा। इससे सही मायनों में आरटीआई कानून का लाभ मिल सकेगा। मगर देखने में आ रहा है कि आजकल सरकारी विभागों की ओर से आरटीआई के जवाब में यह लिख दिया जाता है कि रिकॉर्ड संधारित नहीं है या संधारित नहीं किया जाता, यह पतली गली भी तो हो सकती है।
प्रश्न को बताया काल्पनिक
पुलिस से संबंधी एक अन्य आरटीआई आवेदन के जवाब में पूछे गए प्रश्न को ही काल्पनिक बता दिया गया। महेन्द्रसिंह यादव निवासी भ_ा बस्ती, जंक्शन ने आरटीआई के तहत महानिदेशक पुलिस, राजस्थान, जयपुर से पूछा था कि राज्य के पुलिस थानों में पेश ए, बी एवं सी श्रेणी के आम लोगों के परिवाद/प्रार्थना पत्र की जांच करने तथा सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किए बिना ही मुख्यालय का हवाला देकर उनको अपने स्तर पर ही तलफ (नष्ट) करने का अधिकार किस कानून, धारा, उप धारा आदि के तहत मिला हुआ है। इस संबंध में यदि मुख्यालय से कोई आदेश जारी किए जाते हों तो उनकी प्रतिलिपि दी जाए। पुलिस मुख्यालय से प्रथम अपील पर आवेदनकर्ता को महानिरीक्षक पुलिस एवं राज्य लोक सूचना अधिकारी की ओर से परिवाद/प्रार्थना पत्र को नष्ट करने के संबंध में आदेश की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई गई। साथ ही यह भी लिखा कि अपीलार्थी की ओर से पूछे गए काल्पनिक प्रश्न का उत्तर नियमानुसार अपेक्षित नहीं है। कार्यालय में उपलब्ध सूचना दी जा चुकी है। आवेदनकर्ता ने द्वितीय अपील की है। इसमें सूचना को अधूरी बताया है। साथ ही यह भी लिखा कि थानों में परिवादों के ए, बी व सी श्रेणी में वर्गीकरण एवं निस्तारण के संबंध में प्रशासन, कानून एवं व्यवस्था शाखा से कोई निर्देश/परिपत्र/ आदेश कार्यालय रिकॉर्ड के मुताबिक जारी नहीं किया गया है।
Published on:
01 Feb 2022 07:46 pm
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