बही-खाते की पढ़ाई बोले तो कॉमर्स में थमी घटत, दशक में पहली बार आंशिक बढ़त
– कॉमर्स संकाय से बारहवीं की पढ़ाई करने वालों की घटती संख्या पर लगे कुछ ब्रेक
– जिले से लेकर प्रदेश भर में कॉमर्स संकाय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी
अदरीस खान हनुमानगढ़. बही-खाते की पढ़ाई बोले तो वाणिज्य संकाय में विद्यार्थियों की उपस्थिति वाले खाते के खाली होने की रफ्तार पर कुछ ब्रेक लगा है। यूं कहा जाए कि पिछले आठ-दस बरस में पहली बार वाणिज्य संकाय में ना केवल विद्यार्थियोंं की घटती संख्या थमी है बल्कि आंशिक बढ़त भी हुई है। जबकि पिछले कुछ बरसों से तो हर साल पांच से लेकर आठ-नौ हजार के बीच तक विद्यार्थियों की संख्या कम ही होती जा रही थी।
ऐसे में जिले से लेकर प्रदेश भर में पिछले शिक्षा सत्र की बारहवीं बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी नहीं होना सुखद ही कहा जाएगा। हालांकि परीक्षा में पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या का आंकड़ा अब भी चिंताजनक ही है। बस, यही उत्साहजनक है कि प्रदेश में इस बार विद्यार्थियों की संख्या में पांच-सात हजार की कमी नहीं हुई।
कितनी बढ़ी संख्या
माशिबो की कक्षा बारहवीं कॉमर्स संकाय की परीक्षा में इस साल प्रदेश भर से 27325 विद्यार्थी पंजीकृत थे। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 27013 था। जाहिर है कि कमी की बजाय 325 परीक्षार्थियों की बढ़ोतरी हुई है। अगर वर्ष 2016 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस साल प्रदेश से 50759 विद्यार्थियों ने कॉमर्स संकाय से बारहवीं की परीक्षा दी थी। चार साल बाद वर्ष 2020 में यह संख्या घटकर 36549 रह गई थी जो इस बार 27325 रह गई है। वहीं चाहे कला संकाय हो या विज्ञान संकाय दोनों में इतनी गिरावट नहीं आई है। दोनों संकाय में सामान्य घटत-बढ़त रहती है।
स्थिति तो खराब
जिले की बात की जाए तो कॉमर्स संकाय की स्थिति बेहद खराब है। इस साल जिले से कुल 225 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा दी। हालांकि पिछले साल तो यह आंकड़ा और भी खराब था। वर्ष 2022 में महज 202 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इससे पहले 2021 में 227, वर्ष 2020 में 251 तथा 2019 में 380 ने परीक्षा दी थी।
ध्यान देने की जरूरत
वाणिज्य संकाय के जानकारों की माने तो इसके प्रति विद्यार्थियों की रुचि जगाने पर ध्यान देने की जरूरत है। टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्य रोहित अग्रवाल तथा सहायक आचार्य जगदीशराय जिन्दल बताते हैं कि कभी कॉमर्स संकाय में प्रदेश में एक लाख से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत होते थे। अब जो गिरावट आई है, यह चिंता का विषय है। अत: विद्यालय एवं कॉलेज स्तर पर कॉमर्स विषयों में नवाचार जरूरी है। बारहवीं स्तर पर ऑडिट, बैंकिंग, एंटरप्रेन्योर जैसे विषयों का सिलेबस में समावेश किया जाना चाहिए। सरकार को कुछ क्षेत्र जैसे मैनेजमेंट, बैंक, बीमा और वाणिज्यिक सेवाओं में कॉमर्स के विद्यार्थियों को अधिक अवसर प्रदान करने चाहिए। वाणिज्य संकाय में अच्छे कॅरियर की बहुत संभावना है। किन्तु सीए की पढ़ाई महंगी होने तथा छोटे व मंझले शहरों में शिक्षा की व्यवस्था नहीं होना कॉमर्स में विद्यार्थी घटने का प्रमुख कारण माना जा सकता है।
प्रदेश में परीक्षार्थी
वर्ष विद्यार्थी
2016 50759
2020 36549
2022 27013
2023 27325