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पदमश्री से सम्मानित पहली मुस्लिम महिला मासूमा बेगम, जिन्होंने महिला​ओं के लिए किया काम

देश में पदमश्री से सम्मानित होने वाली पहली मुस्लिम महिला मासूमा बेगम थी। आज उनकी पुण्य तिथि पर उनको श्रद्धांजलि दी गई।

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पदमश्री से सम्मानित पहली मुस्लिम महिला मासूमा बेगम, जिन्होंने महिला​ओं के लिए किया काम

,,मासूमा बेगम की पुण्यतिथि पर दुआ करतीं महिलाएं।

पदमश्री से सम्मानित होने वाली पहली मुस्लिम महिला मासूमा बेगम की पुण्य तिथि पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उनको श्रद्धांजलि दी गई।


बेगम खातून निशा ने इस दौरान बताया कि मासूमा बेगम का जन्म 1902 में हुआ था। उनके पिता खदीफ जंग एक नौकरशाह थे। उनकी मां तैयबा बेगम बिलग्रामी पढ़ी-लिखी महिला थीं। उन्होंने महबूबिया गर्ल्स हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की।


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1922 में, उन्होंने हुसैन अली खान से शादी कर ली। उनके पति अच्छी शिक्षा प्राप्त उदार विचारक थे। इसलिए वह सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों में भाग लेने में सक्षम थी।


उन्हें विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ एक एनसीओ अंजुमन का अध्यक्ष बना दिया गया। उन्होंने खुद को शिक्षा तक सीमित नहीं रखा।

वह राष्ट्रीय आंदोलन से प्रेरित हुई और सामाजिक कार्यक्रमों में में भाग लिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के स्कूली प्रशिक्षण कार्यक्रम, सार्वजनिक सेवा और महिला के लिए कार्यक्रम करने में मदद की थी।


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उन्होंने 1962 में खुद को राजनीतिक मामलों से अलग कर लिया और खुद को पूरी तरह से समाज के लिए के लिए समर्पित कर दिया। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में उनके प्रयासों के लिए उन्हें 1974 में भारत सरकार द्वारा 'पदम श्री' से सम्मानित किया गया था। 2 मार्च 1990 को उनका निधन हो गया। उन्हें मुस्लिम महिलाओं की समानता और न्याय के रूप में गिना जाता है।