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इलाज के लिए अस्पताल में तड़पते रहे मरीज

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी एवं बहुउद्देश्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने एक साथ नेत्रदान का लिया संकल्प

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Patients can not get treatment

Patients can not get treatment

हरदा. जिले के १५२ संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी गत १९ फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके कारण जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं ठप हो गई हैं। सबसे ज्यादा खामियाजा कुपोषित बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। हड़ताल के दिन से ही पोषण पुनर्वास केंद्र पर ताला लटका हुआ है। गुरुवार को संविदा कर्मियों ने शासन की संविदा विरोधी अप्राइजल नीति व एचआर पॉलिसी को लेकर विश्व महिला दिवस को महिला शोषण दिवस के रूप में मनाते हुए सीएमएचओ डॉ. आरके धुर्वे को गुलाब के फूल देकर गांधीगिरी दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों एवं सभी बहुउद्देश्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने एक साथ नेत्रदान का संकल्प करते हुए 198 संकल्प पत्र सीएमएचओ को दिए, जिसमें कहा कि हम संविदा की जिंदगी का भविष्य तो अधिंयारे में है, लेकिन हमारे नेत्रदान के बाद किसी दूसरे की जिंदगी में हम उजाला आएगा।

नवजात शिशु की जान से खिलवाड़
हड़ताल के अठारहवें दिन को जिला अस्पताल सहित खिरकिया और टिमरनी ब्लाक के अस्पतालों मं दिनभर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिला क्षय इकाई में सुबह से मरीजों को परेशान होते देखा गया। उनकी ना तो जांच हो पाई और ना ही दवाईयां मिलीं। जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में अप्रशिक्षित नर्सों से नवजात शिशुुओं का इलाज करवाया जा रहा है, जो उनकी जान से खिलवाड़ है। संविदा स्वास्थ्य संघ के अध्यक्ष केके राजोरिया ने कहा कि यदि नवजातों के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो उसकी संपूर्ण जबावदारी प्रशासन की होगी। इसी प्रकार मैदानी क्षेत्रों में जहां एनआरएचएम की संविदा एएनएम है वहां पर टीकाकरण पूर्णत: प्रभावित हो रहा है।जननी सुरक्षा का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। नसबंदी शिविरों का भी कार्य पूर्णत: बंद हो चुका है। लेकिन वर्तमान में हकीकत यह है कि इन्हीं से सेवाएं ली जा रही है।

कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा इलाज
शहर व गांवों के ज्यादा कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती रखकर इलाज दिया जाता है। किंतु हड़ताल के दिन से ही इस पर ताला लटका हुआ है। ऐसे बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा इन बच्चों को चिन्हित करने के बाद एनआरसी में लाया जाता है, लेकिन वर्तमान में यह बंद पड़ा हुआ है। बच्चों को अस्पताल की बजाय उन्हें आंगनबाडिय़ों में पोषण आहार देकर काम चलाया जा रहा है।

परिजनों को उठाना पड़ा स्ट्रेचर
कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से परिजनों को उनके काम करने पड़ रहे हैं। दोपहर को टेमागांव की सुभद्राबाई गंभीर हालत में जिला अस्पताल में आई, किंतु बाहर स्ट्रेचर ले जाने के लिए कोई कर्मचारी नहीं था। वहीं एक अन्य ग्रामीण को स्ट्रेचर पर लेटाने के लिए भी परिजनों को परेशान होना पड़ा। काफी देर तक मरीज दर्दसे तड़पते रहे, लेकिन कोईकर्मचारी नहीं आया। इसके चलते परिजनों ने ही अस्पताल में स्ट्रेचर ढूंढकर उस पर मरीजों को लेटाकर उन्हें वार्डों तक लेकर गए।

हमारे साथ सौतेला बर्ताव
न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकर्ता भी वेतन विसंगति दूर करने को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। जिलाध्यक्ष संतोष किरार एवं उपाध्यक्ष संतोष दुबे ने कहा कि हर साल सरकार द्वारा आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन उसे पूरा नहीं किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन द्वारा उनके साथ सौतेला बर्ताव किया जा रहा है। वहीं अल्प वेतन पर काम करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी तब तक वह बेमियादी हड़ताल पर रहेंगे।

इनका कहना है
विभिन्न विभागों में पदस्थ संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। सुरक्षा गार्डों को स्टे्रचर से मरीजों को लाने के लिए कहा गया है। संविदा कर्मियों की जगह पर नियमित कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
वहीं नर्सिंग विद्यार्थियों से एसएनसीयू में सेवाएं नहीं ली जा रही है
डॉ. एसके सेंगर, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, हरदा