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सिंचाई के लिए पानी देने विभाग ने किया अनुबंध,फिर भी नहीं दे रहे पानी

हरदा। जल संसाधन मंत्री के प्रभार और कृषि मंत्री के गृह जिले में ही सिंचाई विभाग घोषित क्षेत्र में किसानों को अनुबंध के बाद भी मूंग में सिंचाई के लिए पानी नहीं दे पा रहा है। इससे खेतों में फसल सूखने लगी है। अफसरों व जनप्रतिनिधियों की वादाखिलाफी से नाराज आरजीपीआरएस और किसान कांग्रेस ने प्रभावित सैकड़ों किसानों के साथ झांझरी सोनतलाई माइनर पर सूखी नहर किनारे टेंट लगाकर बेमियादी आंदोलन शुुरु कर दिया है। पानी नहीं मिलने से करीब 800 एकड़ रकबे की मूंग खराब होने की कगार पर है।

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हरदा

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Mahesh bhawre

May 23, 2023

 सिंचाई के लिए पानी देने विभाग ने किया अनुबंध,फिर भी नहीं दे रहे पानी

The water supply department made a contract for irrigation, still not giving water


---जिले में मूंग की बोवनी के लिए तवा बांध से पानी छोड़ने से जिपं में किसान प्रतिनिधियों,जल उपभोक्ता संस्थाओं और अफसरों की बैठक हुई थी। इसमें विभाग ने करीब 40 हजार हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी देने की बात कही थी। विभाग ने पटवारियों के माध्यम से किसानों से अनुबंध भी किया। लेकिन सच्चाई यह है कि किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। जिससे उनकी फसल खराब होने लगी है।


किसानों की जुबानी:

विभाग ने सिंचाई का एलान किया था,तभी महंगा बीज लेकर 20 एकड़ में बाेवनी की। मौसम बिगड़ने पर इल्ली व फंगल लगने पर महंगा स्प्रे डाला। 8 दिन से नहर सूखी पड़ी है। अधिकारी न तो पानी दे पा रहे हैं और न हीं सही जवाब।फसल सूखने लगी है,ऐसे में कर्जदार होना तय है।
- रजत शर्मा,बीड़

पूरी फसल नहर के पानी पर निर्भर है। नहर में बिल्कुल पानी नहीं आ रहा है। भीषण गर्मी के बीच फसल सूखने लगी है। ओसराबंदी के बाद 48 घंटे में पानी देने का वादा था,96 घंटे बाद भी नहीं मिल पा रहा है। अब पानी मिल भी जाए तो फसल का बचना मुश्किल है। यह किसानों से छल है।
-रामशंकर राजपूत,कमताड़ा

यदि पानी नहीं दे सकते थे तो एलान नहीं करना था। यह किसानों से धोखा है कि अनुबंध के बाद भी पानी नहीं दे रहे हैं। यदि पानी न देने के कारण पैसा नहीं भी लेंगे तो खाद,बीज,लागत,मेहनत को पूरी बेकार चली जाएगी। इसकी भरपाई कैसे होगी।
-कैलाश यादव,रोलगांव


किसानों ने कहा कि जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जिले के प्रभारी मंत्री हैं। स्थानीय विधायक कमल पटेल कृषि मंत्री हैं। फिर भी जिले के किसान ही पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। हैरत की बात यह है कि जहां किसान धरने पर बैठे हैं,वहां से कृषि मंत्री का गृह गांव केवल 7 किमी दूर है।

सिंचाई विभाग ने हरदा संभाग में तवा बांयी तट मुख्य नहर से किमी 86.43 से किमी 128.51 टेल तक उपनहर से करीब 18435 हेक्टेयर में सिंचाई की बात कही थी। टिमरनी संभाग में हंडिया शाखा नहर से किमी 0 से 40 तक उपनहर से 19325 हेक्टेयर में पानी देने को कहा था। कुल 137 गांवों में 37760 हेक्टेयर में पानी देना तय था। कलेक्टर की सख्त हिदायत के बाद विभाग ने उन गांवों की भी सूची जारी की थी,जहां तक पानी देने का प्लान था।


इनका कहना है
झांझरी,सोनतलाई माइनर से जुड़े रोलगांव,कमताड़ा,बीड़ सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों को मूंग में पानी देने का विभाग ने अनुबंध किया था। पानी नहीं देने से फसल सूख रही है। इस कारण प्रभावित किसानों के साथ सूखी नहर किनारे टेंट लगाकर अनिश्चिकालीन धरना शुरु किया है। जब तक पानी नहीं मिलेगा,तब तक यहीं रुकेंगे। फसल नुकसानी की भरपाई विभाग का करना होगा।
-हेमंत टाले,प्रदेशाध्यक्ष,आरजीपीआरएस,मप्र
विभाग के अधिकारी बोले..
इस क्षेत्र में अब केवल 600 एकड़ रकबा सिंचाई के लिए बचा है। अभी ओसराबंदी की है। इसके बाद 1100 क्यूसेक पानी इधर डायवर्ट किया है,जहां धरना चल रहा है।
-एसके बिलारे,एसडीओ,सिंचाई विभाग
विभाग के मंत्री बोले...
यह मामला मेरी संज्ञान में है। मैंने जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर और सभी अधिकारियों को व्यवस्था बनाने के निर्देश दे दिए हैं। मंत्री कमल पटेल और टिमरनी विधायक संजय शाह से भी वहां की स्थिति की जानकारी ली है।
-तुलसी सिलावट,जल संसाधन मंत्री मप्र