
नवनीत द्विवेदी
हरदोई. यूपी के हरदोई का गंगा तट राजघाट जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर स्थित है। कन्नौज और हरदोई की सीमाओं से पर स्थित इस गंगा तट का अपना पौराणिक महत्व है। पिछले कई वर्षों से इस गंगा तट पर हो रही रेतीले सोने की लूट की छूट ने इस गंगा तट के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है। खनन का कारोबार करने वाले रसूखदारों ने पिछले 20 से 30 वर्षो में इस गंगातट के बालू का खनन कर पूरे गंगातट को तहस नहस कर दिया है। मामले में पेशबंदी यह होती है कि बालू खनन के लिए यह क्षेत्र शासन व प्रशासन से अनुमन्य है। इसके कारण बेधड़क होकर यहां बालू का खनन किया जाता है। हजारों की संख्या में ट्रॉलियों से बालू भर डंप की जाती है। इस खनन के सरकारी ठेकेदारों का खौफ इतना ज्यादा है लोग इनके नाम से घबराते हैं। लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में ट्रॉलियां बालू भरके ले जाती हैं। जेसीबी की मशीनों से हर रोज यहां गंगा तट दहलता है।
लोगों का कहना है कि पिछली सरकारों में भी गंगा के दोनों पार जेसीबी की गरजना से गंगा मइया कराहती रही हैं। करोडों के इस कारोबार को काला कहने और कारोबारियों को बालू माफिया इसलिए नहीं कहा जा रहा है कि उनके पास खनन करने का टेंडर है, लेकिन सच्चाई यह है कि खनन का टेंडर और खनन नीति व शर्तों का उलंघन कर खूली लूट यहां मची हुई है। इसको लेकर सवाल उठने पर यह कारोबारी हर हद पार करने को तैयार रहते हैं और खुद को पाक साफ बताते हैं। स्थानीय सत्ता संरक्षण होने के कारण यह खनन लगातार चल रहा है। लोगो का कहना है कि जब जिले में अन्य स्थानों पर भी खनन होता है तो फिर राजघाट एरिया को खनन मुक्त घोषित किया जाना चाहिए।
प्रशासन पर भारी सत्ता संरक्षण
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रशासन पर हमेशा सत्ता संरक्षण भारी पड़ जाता है। इसलिए जिला प्रशासन जब कभी इस एरिया को खनन मुक्त करने के लिए पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही करता है या फिर गंगातट को पक्का कराने की पहल होती है तो खनन को संरक्षण देने वाले सत्ता पक्ष के लोग आड़े आ जाते हैं। करोड़ों के कारोबार को चलाने के लिए राजघाट गंगातट को पक्का होने एवं पुल आदि बनने के लिए रोड़े अटकाये जाते हैं।
ऋषिकेश से लेकर बलिया तक गंगातटों में सिर्फ राजघाट बेहाल !
गंगा सफाई अभियान के लिए पिछले लंबे समय से कार्य कर रहे भारतीय कृषक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज दीक्षित ने बताया कि ऋषिकेश से लेकर बलिया तक जितने भी गंगातट है। उनमें सिर्फ हरदोई का राजघाट गंगा तट है बेहाल और कच्चा है। यहां लगने वाला पौराणिक मेला, कल्पवास धीरे धीरे दम तोड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लोग ही यहां वर्षों से खनन कराते रहे हैं और गंगा तट पर बड़े-बड़े वादे करते हैं। मगर हकीकत यह है कि जब तक इस एरिया को खनन मुक्त नहीं किया जाएगा जब तक यहां पुलिस चौकी की स्थापना के साथ माघ मेले और कल्पवास को लेकर बडे इतंजाम नहीं किए जाएंगे, तब तक यहां बदहाली रहना स्वाभाविक है। उन्होंने गंगातट को पक्का करने के साथ ही राजघाट पर पुल निर्माण के साथ ही गंगातट पर मेला और कल्पवास एरिया को खनन निषेध किए जाने की मांग योगी सरकार से की है।
माघ माह भर गंगा तट पर मेला!
यूपी के हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील के राजघाट पर भी प्रयागराज के संगम तट पर लगने वाले माघ मेले जैसा अद्भुत कल्पवास का मेला लगता है। यहां लाखों श्रद्धालु विभिन्न स्नान पर्व के अवसरों पर करोड़ों मनुष्यों को अपने संसाधनों और कृपा से पोषित करने वाली मां गंगा मइया को नमन करते हैं और उनसे सुख सृमद्धि की कामना करते हैं। हर साल माघ माह में करीब ३० दिनों तक यहाँ चलने वाला कल्पवास और गंगा मेला का अपना विशेष महत्व है। मकर सक्रांति पर यहां बड़ी भीड़ होती है जो कि गंगा मैया के आंचल में उनके जल से स्नान करके शांति और संतोष प्राप्त करते हैं।
Published on:
16 Jan 2018 06:53 pm
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