3 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूलों में फीस बढ़ोत्तरी से नाराज अभिभावक संघ, डीएम से कर दी ये बड़ी मांग

अभिभावक संघ हरदोई ने स्कूलों में मची लूट को कंट्रोल करने में त्वरित कार्यवाही की मांग की...

2 min read
Google source verification
dm hardoi

हरदोई. निजी स्कूलों के बेरुखी पूर्ण रवैये को लेकर अभिभावक संघ हरदोई ने जिलाधिकारी पुलकित खरे से मिलकर स्कूलों में हुई फीस वृद्धि पर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन सौंपकर इस पर त्वरित अंकुश लगाये जाने की मांग की। अभिभावक संघ ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि बीते वर्ष जिलाधिकारी हरदोई द्वारा अभिभावक संघ तथा सभी स्कूलों के प्रबंधकों तथा प्रधानाचार्यों की मीटिंग कराई गई थी, जिसके बाद स्कूलों में पुस्तकों तथा स्कूल ड्रेस की बिक्री थोड़ी बहुत रोक लगी थी।

इस वर्ष फिर निजी स्कूलों ने अनुचित फीस वृद्धि, कमीशन पर ड्रेस तथा पाठ्य सामग्री की किसी विशेष विक्रेता के द्वारा बिक्री आदि रवैया अपना लिया है, जिससे अभिभावकों में काफी रोष है।

अभिभावक संघ हरदोई ने निम्न बिंदुओं पर अभिभावकों व बच्चों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में मची लूट को कंट्रोल करने में त्वरित कार्यवाही की मांग की। जिलाधिकारी हरदोई द्वारा आश्वासन दिया गया कि जल्द ही वह स्कूल प्रसाशन और अभिभावक संघ की मीटिंग कराकर समस्या को निस्तारित करवाने का प्रयास करेंगे।

अभिवावक संघ की प्रमुख मांगें
1. स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से की गई फीस वृद्धि वापस ली जाये तथा भविष्य में सी० बी० एस० ई० के दिशा निर्देशों का अनुसार ही फीस वृद्धि के मानक तय किये जाएं।
2. स्कूल प्रत्येक वर्ष कोर्स बदल देते हैं जिस कारण प्रत्येक स्टूडेंट को नई किताबें लेनी पड़ती हैं इस पर रोक लगाई जाये तथा यह व्यवस्था बनाई जाये कि तीन वर्ष से पहले किसी कक्षा की पाठ्य पुस्तकें ना बदली जाये।
3- स्कूल के द्वारा कापी किताबें व अन्य स्टेशनरी बेचने पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाया जाये तथा किसी विशेष दूकान से पुस्तकों तथा ड्रेस की खरीदरी करने के लिए बाध्य ना किया जाये
4- केवल एन० सी० ई० आर० टी० की किताबें ही मान्य की जाएँ
5 -कई स्कूलों ने सप्ताह के अलग अलग दिनों के लिए अलग अलग ड्रेस की व्यवस्था कर रखी है इस पर रोक लगाई जाये तथा केवल एक या दो ड्रेस ही मान्य की जाएं
6- स्कूलों द्वारा प्रति वर्ष बसों की फीस 25 फीसदी से 30 फीसदी रुपये तक बढ़ा दी जाती है जिस पर अंकुश लगाया जाये