Fake ₹20 Lakh Robbery Exposed: हरदोई में 20 लाख की कथित चोरी ने शहर को हिला दिया था, लेकिन पुलिस जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया। चोरी किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि व्यापारी के बेटे ने ही ऑनलाइन सट्टे में हार के बाद खुद रची थी। पुलिस ने मामले का खुलासा कर सबको चौंका दिया।
Online Betting: रविवार की रात हरदोई जिले के कछौना कोतवाली क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी के परिवार में तब हड़कंप मच गया जब घर से लगभग ₹20 लाख मूल्य का नकद व जेवरात चोरी हो जाने की खबर फैली। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम, सीसीटीवी जांच, और क्षेत्रीय गवाहों की मदद से स्थिति की गंभीरता को समझते हुए खुलासा किया कि ये चोरी नहीं, बल्कि व्यापारी के ही छोटे पुत्र प्रखर गुप्ता द्वारा रची गई एक मनगढ़ंत कहानी थी।
कपड़ा व्यापारी राकेश कुमार के पुत्र आयुष गुप्ता ने रविवार रात पुलिस को तहरीर देकर सूचित किया कि चोरों ने रात के अंधेरे में घर की छत से फिसल कर प्रवेश किया। उन्होंने दावा किया कि ₹15 लाख नकद और ₹5 लाख के जेवरात चुराए गए और चोरों ने उनकी मदद के लिए जागे भाई प्रखर गुप्ता के गले पर हाथ रखकर मृतप्राय अवस्था बना दी, पर प्रखर के चिल्लाने की वजह से भाग गए। इस शिकायत के आधार पर हरदोई पुलिस अधीक्षक ने तुरंत जांच कड़ी कर दी। क्षेत्रीय व्यापार संगठन ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए चेताया कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो धर्मयुद्ध जैसा आंदोलन भी किया जाएगा। ऐसे माहौल में पुलिस हरकत में आई और विशेष जांच टीम का गठन किया गया।
पुलिस ने फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। घर के अंतरिक्ष से मिले तलाशी के संकेत चोरों के न होने की ओर इशारा कर रहे थे। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पाया गया कि चोरी की रात कोई अनजान व्यक्ति की तरफ से न तो छत से उतरते हुए दिखा, न ही बाहर निकलते समय कोई संदिग्ध गतिविधि हुई। इसी बीच, पुलिस ने पड़ोस और परिवार वालों से पूछताछ की तो धीरे-धीरे प्रखर की चिंतित और उल्टी प्रतिक्रियाओं से शक गहरा गया। साथ ही ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म पर हुए भारी जोखिम वाले लेनदेन की खुफिया रिपोर्ट सामने आई, जिसने मामले का दूसरा रूप पूरी तरह उजागर कर दिया।
जांच में यह खुलासा हुआ कि प्रखर गुप्ता डिजिटल जुआ/ऑनलाइन सट्टा पर ₹20 लाख तक गवा चुका था। वह इस भारी हार से बचने के लिए घर में चोरी की नकली कहानी रचने लगा और परिवार को चौंका कर समस्या से बचने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक रूप से कोई गिरफ्तारी नहीं की गई, बल्कि उन्होंने फोरेंसिक प्रमाण, सीसीटीवी फुटेज, और ऑनलाइन लेनदेन डेटा को आधार बनाकर स्पष्ट किया कि कोई चोर ही नहीं आया था। प्रखर को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, जबकि आयुष गुप्ता ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति के उज्जवल भविष्य को देखते हुए प्रखर को माफ़ किया है। इस जटिल और अभूतपूर्व मामले को सुलझाने में हरदोई पुलिस ने जो चुस्ती दिखाई, उसे हरदोई पुलिस अधीक्षक ने सराहा। उन्होंने विशेष जांच टीम को ₹25,000 पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित करने की घोषणा की। इस पहल से पुलिस ने पूरे राज्य में विधि-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं के संतुलन का परिचय दिया।
हरदोई में ऑनलाइन सट्टा ज्यों-त्यों बढ़ रहा है, लेकिन रोकथाम की दिशा में सरकार और पुलिस ढुलमुल नजर आ रही है। इस गिरोह में सट्टा, अफीम, गांजा, चरस का अड्डा चलने की खबरें हैं। पुलिस कार्यशैली को देखते हुए जनमानस और व्यापारिक संगठन दोनों ने राज्य सरकार से इन अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने की मांग बढ़ा दी है। एक स्थानीय पार्षद ने कहा“हरदोई जैसे शहर में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना हमारा पहला कर्तव्य है। हमें ऑनलाइन सट्टा के खिलाफ मिलकर काम करना होगा।” ऑनलाइन सट्टा की वजह से वाली घटनाओं को रोकने में शिक्षा और जागरूकता सबसे आवश्यक होगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अगली की शिकायतों को आसान और अपेक्षा से तेज कार्रवाई के साथ निपटाया जाएगा।