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हिरण्यकश्यप के राज में किसी को भी भगवान का नाम लेने की नहीं थी इजाजत!

हुक्म न मानने पर भुगतना पड़ता था बुरा अंजाम।  

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हिरण्यकश्यप के राज में किसी को भी भगवान का नाम लेने की नहीं थी इजाजत!

हरदोई. यूपी के हरदोई शहर के बारे में किदवंती है कि कालांतर में यह नगर असुरराज हिरण्यकश्यप की नगरी थी। हिरण्यकश्यप के राज में भगवान का नाम लेने पर मनाही और जो कोई इस हुक्म को नहीं मानता था उसे बुरा अंजाम भुगतना पड़ता था।
श्रीमद्भागवत कथा में भक्त प्रह्लाद का प्रसंग जब कथा वाचक सुनाते हैं तो इसका वर्णन करते हैं। आचार्य ब्लास्टर कहते है कि पुराणों में भक्त प्रहलाद की कथा का वर्णन है। असुरराज हिरण्यकश्यप भक्त प्रह्लाद का पिता था। हिरण्यकश्यप की नगरी का नाम हरिद्रोही था जहां किसी को भी भगवान का नाम लेने की इजाजत नहीं थी।

यह वरदान प्राप्त किया था
हिरण्यकश्यप ने तपस्यारत रहकर यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसकी मौत किसी इंसान या जानवर के हाथों न हो न धरती पर न आकाश पर मौत और न ही किसी अस्त्र से शस्त्र से न दिन के समय न ही रात के समय मौत हो और यह वरदान प्राप्त करने के बाद वह स्वयं को अमर मानते हुए अत्याचार करने लगा। उसे लगा कि वो भगवान बन गया और उसकी मौत नहीं होगी और वह भगवान विष्णु के प्रति द्रोही था। इस लिए उसने अपने नगर में हरि यानी विष्णु भगवान के नाम पर मनाही कर दी थी जिस कारण उसका नगर हरिद्रोही था। उसका पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही हरिप्रेमी था जिस कारण हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र प्रहलाद को मारने की कोशिश की। उसने अपनी बहन होरिका से प्रह्लाद को जला कर मारने को कहा। होरिका के पास वरदान प्राप्त चुनरी थी जिसे ओढऩे के बाद आग असर नहीं करती थी। आग का प्रचंड आहरा लगाया गया और होरिका प्रह्लाद को लेकर उसमें गई तो तेज हवाओं ने उसकी चुनरी उड़ाकर प्रहलाद पर डाल और इस तरह होरिका जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद का बाल बाँका भी न हुआ।

तभी से होरिका दहन की परंपरा शुरू हुई । इसके बाद हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को खंभे में बांधकर जब वार कर स्वयं मार डालने का प्रयास किया तो भगवान ने खंभे से ही नरसिंह के रूप में प्रकट होकर वरदान का सत्य रखते हुए कुवेरिबेरा यानी सूरज के अस्त होने के ठीक बाद के समय में नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। नरसिंह भगवान का स्वरूप ऊपर का सिंह जैसा और धड़ नर जैसा था। नरसिंह भगवान का मंदिर और भक्त प्रह्लाद का घाट हरदोई में आस पास बना हुआ है। हरदोई शहर में किदवंती है कि कलांतर की हरिद्रोही की किदवंती के चलते यहाँ प्रमुख रूप से होली के मौसम में ही रामलीला और रावण दहन होता है। पहली बार जिला प्रशासन ने हरदोई शहर में श्रीराम लीला का मंचन मेला आयोजित किया है।